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बेटे के इलाज, बेटी की शादी की चिंता में दी जान

7 वर्ष पहले
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बेटीकीशादी के लिए पैसे जमा करने की चिंता, बेटे के इलाज पर लगातार बढ़ रहे खर्च से बिशन सिंह लंबे समय तक लड़ते रहे। बच्चों को उन्होंने कभी का कमी अहसास नहीं होने दिया। एक साल पहले बड़ी बेटी जीत कौर ने भाई के इलाज में मदद के लिए पिता की मदद की इच्छा जताई तो बिशन सिंह ने किसी तरह पैसों का इंतजाम कर उसे सिंगापुर भेजा। सिंगापुर जाने के बाद जीत भी परिवार की मदद करने लगी। लेकिन किस्मत को बिशन सिंह की खुशियां रास नहीं आईं। उनका एक्सीडेंट हो गया। एक्सीडेंट के बाद खर्चे बढ़ गए और कारोबार में घाटा आने लगा। इससे बिशन सिंह की परेशानियां बढ़ गई। क्योंकि बेटे की किडनी में स्टोन का इलाज पैसे की कमी के कारण प्रभावित हो रहा था।

दूसरी चुनौती थी बेटी की शादी जो दो साल पहले तय हो गई थी। बिशन सिंह बेटी को पूरे शानो शौकत से विदा करना चाहते थे लेकिन इसके लिए पैसे नहीं थे। इसी चिंता से टूटकर वह ट्रेन के आगे कूद गए।

बिशन सिंह की प|ी राणों (48) ने बताया कि दो साल पहले बेटी की नूरपूर जटटां के रहने वाले युवक से शादी तय हुई थी। बढ़िया शादी और दाज दहेज की बात को लेकर बिशन परेशान रहते थे। गांव में ही उनकी चक्की और करियाने की दुकान थी। इसमें भी कमाई बहुत नहीं थी। एक्सीडेंट के बाद और घाटा होने लगा। राणों ने बताया कि छोटा बेटा निशान सिंह (16) समुदंडा के ओरिंएट हाई स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ता है और उसकी किडनी में पथरियां हैं। उसके इलाज पर भी खर्च होता है। इसकी मदद के लिए करीब एक साल पहले बड़ी बेटी को एक एजेंसी के माध्यम से सिंगापुर भेजा था। जहां उसकी बेटी जीत कौर घरों का काम करती थी

मृतक के छोटे भाई बख्शी राम ने बताया कि एक्सीडेंट में भाई गंभीर जख्मी हो गया था। तब से उसकी मानसिक हालत कुछ ठीक नहीं रहती थी छोटी से छोटी बात को वह गंभीरता से लेकर चिंतित हो जाता था। वीरवार को उसने ट्रेन के आगे कूद कर खुदकुशी कर ली। नवांशहर पुलिस ने 174 की कारवाई के बाद परिवार वालों को लाश सौंप दी। आज बेटी के आने के बाद बिशन सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अपने परिवार के साथ बिशन सिंह। बेटी के पहुंचने पर आज बिशन सिंह का अंतिम संस्कार होगा। भास्कर