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गोबिंद मेरो है गोपाल मेरो है...

7 वर्ष पहले
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गौमाता को समर्पित श्री महंत कौशल किशोर दास गौशाला में संगतीमय श्रीराम कथा की शुरुआत भगवान श्रीराम और हनुमान जी महाराज के जयघोषों से किया। 108 महंत मुरलीधर दास की महाराज की अध्यक्षता में शुरू हुई कथा में सबसे पहले मंत्रोच्चारण के बीच पूजा अर्चना की गई और ज्योति प्रज्जवलित करने के बाद अयोध्या से पहुंची कथावाचक मानस माधुरी शशि प्रभा जी ने राम भजन से और राम जी की कथा में बजरंग बली को बुला कथा की शुरुआत की।

माधुरी शशि जी ने भजन गोबिंद मेरो है गोपाल मेरो है, जब भक्त नहीं होंगे, भगवान कहां होंगे, राम-राम नाम के भजनों से संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में हमें नाम का सबसे ज्यादा सिमरन करना चाहिए। हमें हर समय सुख में, दुख में भगवान का सिमरन करते रहना चाहिए। उन्होंने माता-पिता, बुजुर्गों की सेवा आदर और सत्कार को ही हमारे सभी तीर्थों का फल बताया। शशि जी ने कहा कि हमारे घर में ही तीर्थ है यदि हम लाभ लें और अपने माता, पिता और बुजुर्गों की सेवा करें तो सभी तीर्थों का पुण्य हमें मिलता है। उन्होंने कन्या का स्थान समाज में सबसे उंचा बताते कहा कि कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं। उन्होंने समाज में कुछ लोगों की ओर से फैली सामाजिक बुराई का कटाक्ष किया और कन्या पूजा के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर महंत मुरलीधर दास, त्रिभुवन दास, शिव शंकर, विनय दास, नरिंदरपाल शर्मा, अशोक शर्मा, दीपक कुमार, तृप्ता देवी, संगीता कालिया, रिषू कालिया, मधुबाला, सुदेश दत्ता, अंजू भल्ला, शिमला शर्मा, प्रेम शर्मा, तृप्ता शर्मा, सतीश कुमार बिल्लू, अरुण कालिया, एसडी स्याल, रामगोपाल शर्मा, प्रताप सिंह, जगदीश शर्मा, विजय कुमारी, संतोष जरियाल, नीलम जरियाल, कृष्णा भल्ला अन्य शामिल थे।

श्री महंत कौशल किशोर दास गौशाला में संगीतमय श्रीराम कथा में मौजूद संगत प्रवचन सुनती हुई।

रामकथा से संगत को जोड़ते साध्वी शशि प्रभा जी।