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18 पुराणों में श्रीमद्ध भागवत पुराण सर्वश्रेष्ठ : वृंदावन दास

7 वर्ष पहले
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श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ समिति की ओर से मोहल्ला सरूप नगर में श्रीमद्भागवत के पहले दिन व्याससीन तथा कथा व्यास वृंदावन दास महाराज वृंदावन वालों ने भावगत का महात्मय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात श्री कृष्ण स्वरूप हैं। कथा सुनने का अवसर जीव को जन्म-जन्म के पुण्यों का उदय है। एेसा सुअवसर आम जीव के किस्मत की बात नहीं है। संसार परिवर्तनशील है तथा आनंदमयी है लेकिन इंसान दुखी है। दूसरी तरफ यदि सच्चे आनंद की अनुभव करना है तो श्री मद्भागवत कथा सुनें। संसार का आनंद क्षणमात्र है लेकिन कथा का आनंद चिरमयी है।

उन्होंने कहा कि 18 पुराणों में श्री भागवत पुराण वैसे ही सर्वश्रेष्ठ है, जैसे नदियों में गंगा है। जिस तरह गंगा का जल शुद्ध रहता है, उसी तरह कथा का प्रवाह सदैव शुद्ध होता है, जो जीव को चिरमयी आनंद प्रदान करता है लेकिन बिना अच्छे कर्मों के जीव तो भावगत की शरण प्राप्त कर सकता है तथा ही चिरमयी आनंद को प्राप्त कर सकता है। वृंदावन जी ने कहा कि जिस जीव पर भगवान की कृपा हो जाती है उसको फिर इस संसार की कृपा की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा यदि भगवान की कृपा प्राप्त करनी है तो श्रीमद्भागवत शरणागति आवश्यक है। इसके श्रवण से जीव अहंकार से रहित हो जाता है। कथा शुरू होने से पहले दोपहर के समय शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान फेस रीडर लक्की स्वामी बतौर मुख्य तिथि शामिल हुए। इस अवसर पर बाबा महिंदर सिंह जी, पंडित ओंकार नाथ, मोहन लाल पहलवान, मुख्य यजमान बलजीत सैनी, एडवोकेट राकेश मरवाहा, मनीष ओहरी, बलदेव राज, परगट सिंह, राजीव नरूला, अजय जैन, समित जैन, मनजीत सिंह, दिलबाग सिंह, गुलशन मलिक, परमजीत सैनी, राहुल सिंह, संजीव शर्मा मौजूद थे।

मोहल्ला सरूप नगर में श्रीमद्भभागवत कथा के पहले िदन कथा व्यास वृंदावन दास महाराज प्रवचन करते हुए। मौजूद संगत भगवान की आरती उतारती हुई।