सालभर दर्द झेलने के बावजूद फिसला मेडल
विशाल भारद्वाज | होशियारपुर
एशियनगेम्स में देश को गोल्ड मेडल दिलाने के लिए सालभर से डौले का दर्द झेल रहे नवजोत चाना का शनिवार को किस्मत ने साथ नहीं दिया। दो महीने पहले स्कॉटलैंड में हुए कामनवेल्थ गेम्स में भी नवजोत इसी दर्द के साथ उतरे थे और रजत पदक जीता था। इसके बाद जब वह घर लौटे तो नवजोत के पिता पाल सिंह ने उनसे आपरेशन कराने के लिए कहा था। लेकिन नवजोत नहीं माने। क्योंकि उन्होंने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने का सपना सजाया था।
पाल सिंह कहते हैं हर दिन किसी किसी खिलाड़ी का होता है। शनिवार उनके बेटे का दिन नहीं था। मंगोलिया के खिलाड़ी ने अच्छा खेला और फाउल बचने का भी उसे फायदा मिला। पाल सिंह ने बताया कि पहले राउंड में चाना ने कुवैत को हराया था लेकिन दूसरे राउंड में मंगोलिया से हार गया।
पाल सिंह ने बताया कि जूडो में एक वर्ड होता है माते। जब रेफरी माते कह देता है तो खेल रुक जाता है। लेकिन शनिवार को माते कहने के बावजूद मंगोलिया का खिलाड़ी रुका नहीं। यह फाउल था। इसका भी उस खिलाड़ी को प्वाइंट मिला। नवजोत इसका विरोध नहीं कर सकता था। क्योंकि इसके खिलाफ कोच बोल सकता है। उन्होंने बताया कि अब नवजोत का अापरेश्न कराना है। इसके बाद वह छह महीने तक नहीं खेल सकेंगे।
नवजोत के पिता पाल सिंह ने कहा कि हर दिन एक खिलाड़ी का नहीं होता।