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महा पाप है गौ माता का वध : वृंदावन दास

7 वर्ष पहले
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मोहल्लासरूप नगर में श्री मद्भागवत ज्ञान यज्ञ मिति की तरफ से करवाई जा रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी वृंदावन दास जी ने गौ माता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि गाय समस्त विश्व की माता है तथा भारत की धरोहर है। गाय माता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। गाय, गीता तथा गंगा की रक्षा करना सभी भारतीयों का पर कर्तव्य है। गाय की तरह ब्राह्मण भी भारत में पूज्नीय हैं, क्योंकि चारों वर्णों में ब्राह्मण सर्वश्रेष्ठ है लेकिन आज समाज में प्रेम की भावना का अभाव पाया जा रहा है। भगवान से प्रेम करना तो दूर आज जीव अपने सगे संबंधियों से भी घृणा और ईर्ष्या रखता है। यदि भातृ प्रेम देखना है तो भरत से बढ़कर आज तक इतिहास में कोई उदाहरण नहीं मिलता। भरत ने भातृ-प्रेम में अयोध्या के राजपाठ की भी परवाह नहीं की तथा श्री राम से वन में भेंट करके उनकी चरणपादुका को राज सिंहासन पर विराजित करके अयोध्या में 14 वर्ष तक निरंतर इंतजार किया।

स्वामी जी ने कहा कि आज जीव भगवान से भक्ति नहीं मांगता बल्कि भौतिक सुख मांगता है। जब भगवत कृपा होती है तो भौतिक वस्तुओं से इंसान का मोह अपने आप ही भंग हो जाता है। माता कुंति ने भगवान से सुख-सुविधाएं मांग कर दुखों की मांग की ताकि वह निरंतर प्रभु का स्वमरण कर सके लेकिन आज जीव दुख में भगवान को याद करता है तथा सुख में भूल जाता है। कथा में महाराज वृंदावन दास जी ने भगवान विष्णु के अवतारों पर भी चर्चा की तथा वामन अवतार की झांकी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। इस दौरान फेस रीडर लक्की स्वामी तथा पूर्व पार्षद ब्रह्मशंकर जिम्पा बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। मौके पर पंडित ओंकार नाथ शर्मा, मोहन लाल, राकेश मरवाहा, बलजीत सैनी, मनीष ओहरी, संजीव शर्मा, मनोहर लाल जैरथ, मनजीत सिंह, गुलशन मलिक, दिलबाग सिंह, राजीव नरुला, गोपाल वर्मा, जगमोहन विज मौजूद थे।

मोहल्ला सरूप नगर में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे िदन स्वामी वृंदावन दास जी कथा करते हुए। मौजूद भक्त प्रवचन सुनते हुए।