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महिलाओं के सम्मान को आगे आए समाज: वृंदावन दास
श्रीमद्धभागवत ज्ञान यज्ञ समिति की ओर से मोहल्ला सरूप नगर में करवाई जा रही श्री मद्भभागवत कथा के पांचवें दिन स्वामी वृंदावन दास जी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण से हमें आनंदमयी जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा मिलती है। नंदोत्सव आनंद का प्रतीक है, यदि आनंद लेना है तो भगवान को समर्पण होना और अपने को भगवान के प्रति न्यौछावर करने से आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने जटायू जी का प्रसंग सुनाया कि किस तरह उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना माता सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया और भगवान राम की गोद में प्राण त्यागे। आज समाज में बेटियों का अपहरण हो रहा है और सारा समाज मुझे क्या की बात सोच कर चुप बैठा है, जो समाज के लिए अति घातक है। जटायू से शिक्षा लेते हुए हमें समाज में महिलाओं के सम्मान को स्थापित करने के लिए आवाज बुलंद करनी चाहिए तथा एकजुट होकर असामाजिक तत्वों के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए। बाल कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान की हर लीला में कोई कोई संदेश छिपा है तथा आज उन्हें बड़ी ही गहनता के साथ समझने की जरूरत है। इस मौके पर फेस रीडर लक्की स्वामी, सिंपल अरोड़ा, मोहन लाल पहलवान, राकेश मरवाहा, पंडित ओंकार नाथ शर्मा, दलजीत सैनी, मनीष ओहरी, संजीव शर्मा, मनजीत सिंह, गुलशन मलिक, दिलबाग सिंह, दिलीप बिल्ला, गौतम मनोचा, राजीव नरूला, विजय कुमार, बनारसी दास, राजेश कुमार टीटू, गोपाल वर्मा, जगमोहन विज, मनोहर लाल जैरथ मौजूद थे।
वृंदावन दास जी
श्रीमद् भागवत कथा के दौरान प्रवचन सुनते हुए भक्त।