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जिले के 350 स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन रिलीज करे सरकार : हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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पंजाबएंडहरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि केस की अगली सुनवाई 18 दिसंबर 2014 से पहले पहले होशियारपुर जिले के सिविल सर्जन कार्यालय सिविल अस्पतालों में तैनात 350 अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन जारी करे।

बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव नारायण रैनी की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि ऐसा नहीं करने पर 18 दिसंबर को स्वास्थ विभाग के सचिव अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखें। आदेश में यह भी कहा गया है कि अदालत में आधारहीन तर्क स्वीकार नहीं किए जाएंगे। गौरतलब है कि सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अजय बग्गा अन्य कर्मचारियों की तरफ से वेतन रिलीज करने के लिए अदालत में केस दायर किया गया था। स्वास्थ विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की तरफ से केस की पैरवी एडवोकेट के एस डडवाल कर रहे हैं।

गुरदासपुरकी अदालत ने वेतन रोकने के आदेश दिए थे : सिविलसर्जन कार्यालय सिविल अस्पताल में तैनात अधिकारियों कर्मचारियों डा. सुरिंदर मलिक, डा. चुन्नी लाल काजल, डा. अजय बग्गा , डा. सुनील अहीर, सुपरिंटेंडेंट नत्थू राम, जसविंदर सिंह, सुरिंदर वालिया और दर्जा चार के प्रधान राकेश कुमार सिविल अस्पताल और कुलदीप राज ने बताया कि स्वास्थ विभाग के उच्चाधिकारियों की असंवेदनशीलता के साथ गुरदासपुर की अदालत में निर्देशानुसार सिविल सर्जन कार्यालय का वेतन जनवरी 2015 तक सील कर दिया गया है। इस संबंधी अदालत पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की गई थी गुरदासपुर की अदालत ने हैड सील करने के निर्देश इस कारण दिए थे कि विभाग ने एक डा. अशोक ओबेराय को एक करोड़ 90 लाख रुपए की अदायगी नहीं की थी।

अब इस संबंधी सिविल सर्जन के मुलाजिमों ने हाईकोर्ट में एक निजी पिटीशन दायर कर अदालत में ध्यान में लाया कि डाक्टरों का एक 1 करोड़ 90 लाख रुपए देना सरकार की जिम्मेदारी है, कि सिविल प्रशासन कार्यालय से संबंधित कर्मचारियों की। मुलाजिमों का वेतन सरकार की निजी संपति नही हैं इस कारण मुलाजिमों को वेतन दिलवाया जाए।