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पैसे बचाकर बेटे को तलाशने के लिए इश्तिहार छपवाए, लाश मिली

7 वर्ष पहले
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पांचदिनसे पज्जोदियोता के सेवा सिंह जवान बेटे की तलाश में भटक रहे थे। दिन-रात धक्के खाने के बाद भी जब बेटा हरपाल नहीं मिला तो बूढ़े बाप ने मजदूरी के कुछ पैसे बचाकर इश्तिहार छपवा लिए। हरपाल 13 सितंबर की सुबह घर से सिविल अस्पताल दवा लेने निकला था। इसलिए सेवा सिंह भी इश्तिहार चिपकाने के लिए सबसे पहले सिविल अस्पताल ही पहुंचे। उन्हें क्या पता था कि पांच दिन बाद बेटा इस हालत में मिलेगा। जहां से उन्होंने जिंदे बेटे की तलाश शुरू की उसी अस्पताल के लाशघर में पड़ा एक मुर्दा उनके कलेजे का टुकड़ा निकलेगा ऐसा भी उन्होंने नहींं सोचा होगा।

सेवा सिंह ने बताया कि हरपाल-24 की दिमागी हालत कुछ ठीक नहीं थी। वह अक्सर सिविल अस्पताल दवा लेने जाता था। रोज की तरह 13 सितंबर सुबह भी वह दवा लेने निकला लेकिन इसके बाद घर नहीं लौटा।

13 सितंबर की पूरी रात परेशान रहने के बाद 14 से उन्होंने तलाश शुरू की। मजदूरी करते हैं। बहुत पैसे और पहुंच नहीं थी इसलिए अकेले ही तलाश में जुटे रहे। रिश्तदारों के यहां आसपास सभी जगह पता किया लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। दो दिन बाद भी जब बेटा नहीं मिला तो मजदूरी से कुछ पैसे बचाकर बेटे की गुमशुदगी की इश्तिहार छपावा लिए। वीरवार सुबह-सुबह सिविल अस्पताल पहुंच गए। उम्मीद थी कि इश्तिहार देखकर बेटा लौटा आएगा या फिर कोई सूचना दे ही देगा। इश्तिहार चिपकाने के बाद भटकते-भटकते सिविल अस्पताल के लाशघर पहुंच गए। वहां बैठे युवकों को इतिशहार दिखाकर बोले इसे कहीं देखा है। जवाब नहीं मिला। इसी बीच एक पुलिस मुलाजिम वहां पहुंच गया और उसने इश्तिहार देख लिया। पुलिस कर्मी ने सेवा सिंह से कहा कि इस सूरत से मिलती एक लाश शिनाख्त के लिए पिछले तीन दिनों से लाशघर में रखी है।

इसके बाद सेवा सिंह शव की शिनाख्त के लिए पहुंचे तो बस इतना ही बोले रब्ब तूं की कर दित्ता। लाश उनके बेटे हरपाल की थी जिसे वह पिछले तीन दिनों से पूरे शहर में खोज रहे थे। पुलिस मुलाजिमों ने बताया कि लाश तीन दिन पहले आईटीआई के पास मिली। एएसआई सरवण सिंह ने बताया कि शिनाख्त होने पर लाश लाशघर में रख दी गई थी। पुलिस ने सेवा सिंह के बयानों के बाद 174 की कार्यवाही की शव का पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिया।

हरपाल सिंह