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नाम भज ले हरि हरि, राम नाम सुखदायी भजन पर झूमे भक्त

7 वर्ष पहले
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होशियारपुर | श्रीकिशोरी कृपा मंडल में संध्या बेला को आगे बढ़ाते हुए स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि कोई भी वस्र बदल लेने से संत नहीं हो जाता। संत का स्वभाव, रहन-सहन ही उनकी पहचान है। जो संत हमें सद्मार्ग, ज्ञान और चिंतन से हमारा मार्गदर्शन करता है, वही संत हैं। जिसका अपना कोई निजी स्वार्थ, उच्च आचरण, ईष्या दवंश से रहित हो, ऐसे संत की शरण में जाना चाहिए। पं. पाठक ने नाम भज ले हरि हरि, राम नाम सुखदायी आदि भजनों से भक्तों को झूमने पर विवश कर दिया।शामली से आए कथावाचक और भजन सम्राट पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि एक दिन भक्त कबीर की कुटिया में एक चोर शरण प्राप्ति के लिए आया। उसने कहा कि उसके पीछे पुलिस लगी है। भक्त कबीर ने चोर को अंदर लिटा दिया और उसको चादर ओढ़ा दी। इतने में पुलिस पहुंच गई। उन्होंने भक्त कबीर से चोर संबंधी पूछा तो भक्त कबीर ने कहा कि हां वह चोर मेरे घर के अंदर ही है। पुलिस ने कबीर की वाणी को मजाक समझा और वहां से चले गए भक्त कबीर ने चोर के पूछने पर कहा कि जिस चादर से तुम्हें छिपाया था उस चादर के साथ मैं हमेशा राम नाम का सिमरन करता हूं। तो तुम्हें मैंने नहीं राम नाम के कीर्तन, सिमरन ने बचाया है।