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भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और नंदोत्सव की कथा सुनाई
अंदर छिपे ज्ञान को केवल गुरु ही जान सकता है : साध्वी भारती
पीर लख दाता की दरगाह पर जोड़ मेला
श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ समिति की ओर से मोहल्ला सरूप नगर में करवाई जा रही श्री मद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म एवं नंदोत्सव की कथा सुनाई। स्वामी वृंदावन दास जी ने कहा कि भक्ति के बिना मनुष्य का मन स्थिर नहीं हो सकता। जैसे खौलता दूध तथा बहते पानी में मनुष्य अपना चेहरा स्पष्ट नहीं देख सकता। वैसे ही इस जीवा रुपी बहती नदी में जीव अपनी आत्मा का दर्शन नहीं कर सकता। क्योंकि जीव का मन चंचल है और परमात्मा के दर्शन में यही बाधा करता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि हनुमान जैसे महान भक्त आज तक नहीं हुआ, जिन्होंने अपना सारा जीवन श्रीराम की भक्ति में व्यतीत किया। आज कलियुग में जहां-जहां भी कथा होती है, वहां पर हनुमान जी कथा सुनने के लिए किसी किसी रूप में अवश्य आते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जीव अपना धन भागवत कार्य के लिए दान दे तो धन पवित्र हो जाता है। जिस जीव के जीवन में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का आगमन हो जाता है। उस जीव का जीवन सफल हो जाता है तथा उस जीव की आत्मा का परमात्मा से मेल होने में कोई बाधा नहीं रह जाती। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी भी निकाली गई। इस मौके पर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रधान और विधायक सुंदर शाम अरोड़ा, पूर्व पार्षद मोहन लाल पहलवान, एडवोकेट राकेश मरवाहा, पंडित ओंकार नाथ शर्मा, दलजीत सैनी, मनीष ओहरी, संजीव शर्मा, मनजीत सिंह, गुलशन मलिक, दिलबाग सिंह, राजीव नरूला, गोपाल वर्मा, जगमोहन विज, मनोहर लाल जैरथ आदि मौजूद थे।
स्वामी वृंदावन दास जी ने कहा कि बहती नदी में जीव आत्मा का दर्शन नहीं कर पाता।
साध्वी श्याम भवी भारती।