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नवजात को 15-15 दिन में पोलियो रोधी खुराक पिलाएं
जिलाटीकाकरणअधिकारी डा.अजय बग्गा ने कहा कि स्वास्थ विभाग की तरफ से 21, 22 23 सितंबर को बाहरी प्रदेशों से आए 114408 मेहनतकश मजदूरों के परिवारों में रह रहे 22526 बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाई जाएगी। इसके लिए जिले में कुल 161 टीमों का गठन कर दिया गया है। डा. बग्गा ने बताया कि पोलियो के तीन तरह के वायरस होते हैं जिनमें से पी 2 खत्म हो चुका है पी 3 का अबतक कोई केस ही सामने नहीं आया है। स्वास्थ विभाग फिर भी पी 1 पी 3 को ध्यान में रख पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य लिया हुआ है।
डा. अजय बग्गा ने बताया कि यूं तो पाकिस्तान से लगती सीमा के पास विशेष पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं, मगर फिर भी यदि किसी इलाके में पोलियो प्रभावित देश से कोई परिवार अपने साथ 0-5 वर्ष तक का बच्चा लेकर आता है तो उनके परिजनों को चाहिए कि उस बच्चे को पोलियो वैक्सीन दिलवाने के लिए नजदीकी स्वास्थ केंद्र में जरूर ले जाएं। डा. बग्गा ने आगे कहा कि भारत में प्रत्येक नवजात बच्चे को जन्म के 15 दिन के भीतर पोलियो वैक्सीन की दो बूंदें अवश्य पिलाई जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त नियमित टीकाकरण के दौरान भी बच्चे को 6, 10 14 सप्ताह का होने पर पोलियो वैक्सीन की बूंदें पिलाने के लिए अभिभावकों ंको नजदीकी स्वास्थ केंद्र के कर्मियों से संपर्क करना चाहिए।
डा. अजय बग्गा ने कहा कि कई बार प्रवासी मजदूरों, झुग्गी झोपडिय़ों, भट्ठों, क्रैशर, गुड़ बनाने वाले अस्थाई कारखानों स्लम एरिया में रहने वाले परिवारों के बच्चे पोलियो वैक्सीन से वंचित रह जाते हैं। इन बच्चों पर वाइल्ड पोलियो वायरस आक्रमण कर सकता है, इसीलिए सभी सामाजिक धार्मिक संगठनों से अपील की कि यदि पोलियो वैक्सीन से वंचित कोई बच्चा उनके संपर्क में आता है तो इस संबंधी स्वास्थ विभाग को तुरंत सूचित करें। 15 वर्ष तक के यदि किसी बच्चे के शरीर के किसी अंग में अचानक कमजोरी, ढीलापन अधरंग के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना भी तुरंत स्वास्थ विभाग को दी जाए ताकि इस बच्चे की जांच के बाद स्टूल सैंपल पोलियो लेबोरेटरी में भेजे जा सकें। यदि स्टूल सैंपल में पोलियो वायरस नहीं आता तो इससे साबित होता है कि वातावरण में पोलियो वायरस का संचार नहीं हो रहा।
पोलियो उन्मूलन के बारे में बताते डा. अजय बग्गा और डा.शैलेश कुमार।