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परमिंदर बरियाणा | होशियारपुर

6 वर्ष पहले
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परमिंदर बरियाणा | होशियारपुर

मैंनेदोदिन पहले इसे मारना था। फिर मन बदल गया कि चलो छोड़ देते हैं लेकिन मां की परेशानी देखी नहीं जा रही थी। यह बात रोहित मेहता ने भास्कर को बताई। उसने कहा कि मेरे पिता ने ही 2006 में कमल चौधरी का तख्ता पलटने में अहम भूमिका निभाई थी। तब से ही विवाद शुरू हो गया था।

एक दिन मेरे पिता ने भल्ला को गैर हाजिर पकड़ा था। बाद में मैनेजमैंट ने उसे बचा लिया। उसके बाद भल्ला और एक पूर्व प्रिंसिपल ने मैनेजमैंट को गुमराह करना शुरू कर दिया। मां मेरे बाप के खिलाफ षड्यंत्र रचना शुरू कर दिया। मां को एक घपले में फंसाया। उन्हें नौकरी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। जब मेरा बाप एक दिन साइकिल पर जा रहा था तो किसी ने पीछे से हिट किया। ये उन लोगों ने ही करवाया था। उनके सिर में चोट लगी और डेढ़ साल बाद मौत। मां की जिल्लत बर्दाश्त नहीं हो रही थी। मैंने असले का लाइसेंस बनवाकर रिवॉल्वर खरीदा। दो दिन पहले भी मैं कॉलेज गया था। मैं उस तक पहुंच भी गया था पर मन बदल गया। आज मैं निश्चय करके गया था। शिमला पहाड़ी से रिक्शा लिया। कॉलेज पहुंचा। वहां पर पहले इसके साथ कॉलेज का मुलाजिम था। मैं किसी और को चोट नहीं पहुंचाना चाहता था। जैसे ही कालेज में भल्ला कमरे से अकेले निकला मैंने उस पर सारी गोलियां दाग दीं। प्रिंसिपल और कुछ और अध्यापक जिनसे मैं पढ़ा था उनको कहा कि अब पुलिस बुला लो। लोग मेरे से डर रहे थे मैंने कहा कि आप को डरने की जरूरत नहीं है मैंने जिसे मारना था उसे मार दिया।