पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पैरेंट्स बोले फादर थॉमस को हटाओ

पैरेंट्स बोले- फादर थॉमस को हटाओ

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
माउंटकार्मलस्कूल में फीस का मामला फिर तूल पकड़ गया है। सोमवार को पैरेंट्स ने प्रेस कांफ्रेंस कर प्रिंसिपल फादर थॉमस के निलंबन की मांग की। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि फादर थॉमस ने अभिभावकों के लिए अभद्र शब्दावली का इस्तेमाल किया है। फीस कमेटी की सुनवाई 16 दिसंबर को है। इससे पहले अभिभावकों से फीस मांगना अनुचित है। फीस कमेटी के दिशा निर्देशों के बाद ही स्कूल ने जुलाई 2014 से फीस वसूली पर रोक लगाई थी। इसलिए पेरेंट्स एसोसिएशन पेरेंट्स के बीच हुई बैठक में तय किया गया कि 16 दिसंबर की सुनवाई के बाद ही फीस देने संबंधी निर्देशों का पालन किया जाएगा।

बातचीत करते हुए पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव ठुकराल, महासचिव रंजीत सिंह राणा, उपाध्यक्ष राकेश शर्मा, सचिव रघुवीर सिंह, कपिल देव, अमित टंडन, रोहित चोपड़ा, सुरेश बांसल ने कहा कि छह दिसंबर को स्कूल के प्रिंसिपल फादर थामस द्वारा लिखित पत्र बच्चों के माध्यम से उन्हें मिला। जिसमें पत्र जारी करने की तारीख पत्र संख्या नहीं है।

पत्र में फादर थामस ने हाईकोर्ट द्वारा गठित जस्टिस अमर दत्त फीस कमेटी की सुनवाई को स्थगित बताया है। यह झूठ है। पैरेंट्स ने कहा कि पिछले दो सालों में की गई फीस वृद्धि को लेकर हाईकोर्ट द्वारा गठित फी कमेटी में अभिभावकों द्वारा जो शिकायत की गई है।

उसकी अगली सुनवाई 16 दिसंबर को बाद दोपहर विद्या भवन मोहाली में है। उससे पहले ही फादर ने विद्यार्थियों के माध्यम से पत्र भेज कर फीस मांगी है जो कि हाईकोर्ट द्वारा गठित फीस कमेटी के आदेशों का निरादर है। अभिभावकों ने एक मत होते हुए स्कूल मैनेजमेंट से मांग की है कि फादर थामस को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए।

प्रेस क्लब में कांफ्रेंस करते पैरेंट्स एसोसिएशन के मैंबर।

हम कोर्ट के आदेशों को मानते हैं : फादर थॉमस

फादरथामस ने कहा कि वे और उनकी संस्था कोर्ट के आदेशों का पालन करती है। उन्होंने कहा कि वे अभिभावकों से जो फीस मांग रहे है वह 2013-14 के दूसरी तीसरी क्वार्टर की है। बढ़ी हुई फीस पर अभी फीस कमेटी ने रोक लगाई है जो कि अभी हम नहीं ले रहे है। उन्होंने कहा कि वे शुरु से ही कोर्ट के आदेशों का पालन करते रहे हैं। हमने किसी से कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया। बोलने वालों को रोका नहीं जा सकता।