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शुद्ध कर्मों के सहारे मिलती है परमेश्वर की कृपा
इंसान खुद को सुधारे, संसार अपने आप सुधर जाएगा : सतपाल सिंह
संतनिरंकारी सत्संग भवन में संत समागम करवाया गया। महात्मा सतपाल सिंह ने प्रवचन करते हुए कहा कि हर इंसान अपने-आप को सुधार लेगा तो समाज, देश तथा संसार में स्वत: ही सुधार होता चला जाएगा। आज जरूरत है प्रीत, प्यार, उदारता, एकता, सहनशीलता और मानवीय मूल्यों की कद्र करने की। बाबा जी ने कहा कि निरंकारी मिशन की ओर से ऐसे समागमों का आयोजन इसी उद्देश्य से किया जाता है। इंसान किसी भी नाम से ईश्वर को याद करता है, उसे जान ले, जिससे मानवता के एकत्व का भी अहसास हो जाए।
संसार से वैर, नफरत, विरोध, द्वेष, ईर्ष्या तथा बेगानेपन की भावनाएं मिट जाएं। उन्होंने कहा कि अंत समय में यह शरीर जिसका हर समय इतना ध्यान रखा जाता है यह भी साथ नहीं जाता। मां-बाप, पति-प|ी, रिश्तेदार सगे संबंधी दोस्त मित्र भी केवल श्मशानघाट तक के साथी होते हैं। इसके अतिरिक्त माया, धन-दौलत जिसके लिए इंसान सारी जिंदगी भाग-दौड़ करता रहता है और जिसके कारण इंसान को संसार में रहते हुए दुनियावी इज्जत प्राप्त होती है, यह श्मशान घाट तक भी इंसान के साथ नहीं जाती इसलिए हमें जीते जी यह जान लेना चाहिए कि अंत समय में केवल प्रभु परमात्मा ने ही हमारा साथ देना है आज संसार में प्रेम और नम्रता के वातावरण की जरूरत है यह वातावरण चारों तरफ हो यही संतों की अभिलाषा रहती है।
एक बाप अच्छा बाप बने, एक मां अच्छी मां बने, एक बेटी अच्छी बेटी बने, एक बेटा अच्छा बेटा बने, एक पड़ोसी अच्छा पड़ोसी बने, एक नागरिक अच्छा नागरिक बने, तभी वास्तव में धर्म की जय होगी तथा अधर्म का नाश होगा, प्राणियों में सद्भावना होगी और विश्व का कल्याण भी तभी संभव हो पाएगा अन्यथा केवल कहने मात्र से धर्म की जय तो कभी हुई है और ही हो सकती है क्योंकि इस संसार में अधर्म के झंडे के नीचे खड़े हो कर धर्म की जय कहने वाले भी नहीं बच पाए चाहे वे कितने ही विद्वान क्यों थे। इस अवसर पर महात्मा सुरजीत सिंह, कपूरथला के क्षेत्रीय संचालक महात्मा सरूप सिंह अन्य उपस्थित थे।
प्रवचन करते हुए महात्मा सतपाल सिंह जी।