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इंसाफ नहीं मिला तो जान दूंगी

7 वर्ष पहले
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चारसालसे इंसाफ के लिए मैं धक्के खा रही हूं। कोई सुनवाई नहीं हुई। अब मुझे इंसाफ नहीं मिला तो मैं खुदकुशी कर लूंगी। इसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। नरूड़ की दलजीत कौर ने यह बात कही। प्रेस कांफ्रेंस में दलजीत ने बताया कि उसके भाई हरजिंदर सिंह निवासी बिंजो को गांव के ही एक ट्रेवल एजेंट बालकृष्ण ने 2009 में विदेश भेजने का झांसा दिया था। रुपयों की कमी थी इसलिए उन्होंने 40 मरले का प्लाट बालकृष्ण को दिया। तब बालकृष्ण ने वादा किया था कि वह 7-8 महीने में भाई को ग्रीस भेज देगा।

जुलाई 2010 को बालकृष्ण अपने दोस्त रछपाल सिंह के साथ घर आया और हरजिंदर को साथ ले गया। उसने कहा था कि एक-दो दिन में उसकी फ्लाइट है। लेकिन 31 जुलाई को उन्हें फोन आया कि हरजिंदर का कत्ल हो गया है। कत्ल का केस अमरगढ़ संगरूर के थाने में दर्ज कराया गया। केस बालकृष्ण के दोस्त रछपाल की तरफ से दर्ज कराया गया। लेकिन बाद में रछपाल गवाही से ही मुकर गया और केस रफादफा हो गया। हमने पुलिस को बयान दिया कि कत्ल जमीन की लालच में बालकृष्ण ने करवाया है पर कोई सुनवाई नहीं हुई। बालकृष्ण ने उनकी जमीन हड़प ली।दलजीत कौर ने बताया कि बालकृष्ण को पूरी उम्मीद थी कि बजुर्ग पिता साधू सिंह कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। पर जब मामले की छानबीन शुरू हुई तो फंसने के डर से बालकृष्ण ने यह बयान दिया कि हरजिंदर की मौत के बाद उसने एक पैसे वापस कर दिया। इसके लिए उसने बयाने के झूठे कागज बनाए। दलजीत कौर ने तत्कालीन डीसी दीप इंदर सिंह से इसकी शिकायत की। मामला झूठा निकला और धोखाधड़ी के आरोप में अष्टाम फरोश जगतार सिंह का लाइसेंस रद कर दिया गया। इसके बाद डीसी दीप इंदर सिंह ने तत्कालीन एसएसपी सुखचैन सिंह गिल को मामले में धोखाधड़ी करने वाले बाल कृष्ण, निरंजन सिंह, जगदीप सिंह, महंगा सिंह, राम तीर्थ, शिव सिंह पर 420 का पर्चा देकर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिख दिया। लेकिन केाई एक्शन नहीं हुआ।