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मासिक भंडारे को संस्कार के मामले से जोड़ना गलत
समाधिमें गए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार बारे हाईकोर्ट के आदेश के बाद हलचल मच गई है। गोशाला सेवा समिति के राकेश गांधी ने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान डेरा नहीं बल्कि सोसायटी के एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है।
उन्होंने कहा कि आशुतोष महाराज को समाधि बारे बताकर गए हैं। किसी का उनकी समाधि पर कोई एतराज नहीं होना चाहिए क्योंकि यह संस्थान का निजी मामला है। आश्रम के साथ जुड़े लोग पढ़े-लिखे, समझदार, अमन-शांति पसंद और प्रशासन का हमेशा सहयोग करने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दलीप झा और पूर्ण सिंह बारे स्पष्ट कहा है कि उनका आशुतोष महाराज के साथ कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा 14 दिसंबर के मासिक भंडारे को भी संस्कार के मामले के साथ जोड़ना सरासर गलत है, क्योंकि यह भंडारा 20-25 साल से होता रहा है। इस पर राजनीति की रोटियां सेंकना गलत है।
श्रद्धालुओं ने सरकार से मांग की है कि संस्थान से जुड़े लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना का ध्यान रखा जाए और कोई भी ऐसा फैसला लिया जाए जिससे समाज में अशांति फैलने का खतरा हो।
राकेश गांधी ने बताया कि संस्थान डेरा नहीं बल्कि एक साेसायटी है।