पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जीरो वाट वाले बल्ब को अपनी ही शक्ति में जलना चाहिए : डाॅ. चंद्र भूषण

जीरो वाट वाले बल्ब को अपनी ही शक्ति में जलना चाहिए : डाॅ. चंद्र भूषण

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रीमद्भागवतकथा सप्ताह यज्ञ के दूसरे दिन कथा का आयोजन श्री सत्यनारायण मंिदर में किया गया। कथा को आगे बढाते हुए कथा व्यास डा. चंद्र भूषण मिश्र ने कहा कि श्रीमद भागवत में मात्र आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं है, बल्कि जीवन जीने के तरीकों की विज्ञान सम्मत व्याख्या की गई है।

महाभारत की पांच स्त्रियों की चर्चा करते हुए कथा व्यास ने बताया कि द्रोपदी अपने पांच बेटों की हत्या करने वाले को छोड़ देने के लिए कहती है। कुन्ती भगवान से दुख मांगती है सुभद्रा अपने बेटे अभिमन्यु के मरने से प्रसन्न होती है, क्योंकि वह कृष्ण के सामने न्याय के लिए लड़ता हुआ मरता है। उत्तरा अपने गर्भ में पलते हुए बच्चे को भक्त मानकर गर्भ में रक्षा करने के लिए प्रार्थना करती है। दादा भीष्म भगवान का दर्शन करते करते अपने प्राण त्यागते है। दूसरे संबंध में दो तरह के व्यक्तियों की चर्चा की गई है।

एक त्यागने वाले और बटोरने वाले। प्रवत्ति करने वाले संग्रह करते है और निवृत्ति वाले त्याग करते हैं। जीरो वाट वाले बल्ब को अपनी ही शक्ति में जलना चाहिए। अगर किसी के मन में भोग की इच्छा है और ऊपर से त्याग का प्रपंच कर रहा है तो वह उसके और समाज के लिए दोनों के लिए घातक है। इस कथा का आयोजन बाल कृष्ण केन परिवार ने विश्व कल्याणार्थ किया है। बाल कृष्ण ने कहा कि यह कथा 11 नवंबर तक 2 से 6 बजे तक अनवरत चलती रहेगी।

श्रीमद् भागवत कथा करते हुए डाॅ. चंद्र भूषण मिश्र।