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श्रीराम को बनवास भेजने पर पिता दशरथ पर क्रोधित हुए भरत

7 वर्ष पहले
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मस्जिदचौकश्री राम लीला धर्म कमेटी की ओर से करवाई जा रही श्री राम लीला में भरत मिलाप नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक का उद्घाटन अरोडा वंश पंजाब के उपाध्यक्ष होटल व्यवसायी धर्मपाल ग्रोवर ने किया। श्री गणेश अराधना के उपरांत श्री राम जी की आरती उतारी गई। माता कैकई को मिले दो वरदान के मुताबिक पिता राजा दशरथ द्वारा श्री राम को 14 वर्ष के वनवास पर भेजा जाता है तो भाई लक्ष्मण सीता भी वनवास को उनके साथ चले जाते है। पूरी पूजा भी साथ जाने की जिंद करती है परंतु श्री राम सभी को वापिस भेज देते है। जंगल को जाते समय श्री लक्ष्मण पिता पर क्रोधित होते है तो श्री राम उन्हें समझौते है कि यदि पिता पर तू इतना गुस्सा करता है तो तू मेरा भाई ही नहीं। तब लक्ष्मण कहते है कि हम दो जिसमें एक प्राण है। तब राम कहते है कि पिता का एक तरफ पुत्र मोह तो दूसरी तरफ धर्म खड़ा है यदि धर्म छोडेंग़े तो समाज में कलंकित होंगे। इस लिए उनका आदेश सिर माथे पर है।

दूसरी तरफ जब भरत को राजपाठ पर बैठाने की तैयारी की जाती है तो वह भाई राम को मनाने जंगलों की ओर जाते हैं। अयोध्या नगरी के लोग भी उनके साथ जाते है तथा श्री राम जी को मनाने का प्रयास करते है। परंतु वह पिता द्वारा दिए वनवास के आदेश के बारे में जिक्र करते है तो भरत कहते है यदि उनको नहीं जाना तो वह अपनी चरण पादुका खड़ाऊ उन्हें दे दे। जितनी देर वह जंगल से नहीं लौटेंगे तब तक सिंहासन पर चरण पादुका विराजमान होगी। इस अवसर पर शाम सुंदर मल्हन, निर्देशक एसके मिश्रा, रजिंदर कौडा, अशोक गुप्ता, सुभाष चंद्र, परमिंदर गुप्ता, पवन शर्मा, नरेश गुप्ता उपस्थित थे।

मस्जिद चौक में करवाई जा रही राम लीला में श्री राम वनवास, योगी भरत मिलाप के आयोजन दौरान आरती करते हुए अरोडा वंश पंजाब के उपाध्यक्ष होटल व्यवसायी धर्मपाल ग्रोवर।