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महापुरुषों ने हमें समझाया, हम आडंबरों में फंसे रहे

7 वर्ष पहले
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गुरुद्वाराश्री गुरू रविदास सेवक सभा रेल कोच फैक्टरी में पूर्णमासी के उपलक्ष्य पर धार्मिक समारोह करवाया गया। इस मौके पर श्री सुखमणि साहिब जी के पाठ के भाेग के बाद कीर्तन दरबार सजाया गया। गुरुद्वारा साहिब जी के हैड ग्रंथी दिलबाग सिंह ने संगत को हरि जस गायन करवाया।

इसमें विशेष तौर पर बाबा सर्बजीत सिंह सुल्तानपुर और श्री निरवैर खालसा धारना कीर्तनी जत्थे ने संगत को गुरुबाणी सुनाई। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों ने हमें अनेकता में एकता का संदेश दिया, परंतु इंसानियत के दुश्मनों ने समाज को जात-पात में बांट दिया। संत वहीं होता हैं, जो सिमरन, नाम, त्याग के गुणों से भरपूर हो।

महापुरुषों ने हमें वहमों-भ्रमाें के जाल से बाहर निकालने के लिए कई प्रय| किए, किंतु हम कर्म कांड के आडंबरों में फंसे रहे। उन्होंने कहा कि हमें आपसी वैर-विरोध को भूल कर एक दूसरे से भाईचारे की भावना पैदा करनी चाहिए।

इस अवसर पर गुरतेज सिंह, रघबीर चंद, किशन सिंह, उज्जैन सिंह, कश्मीर सिंह, रूप लाल, जसवंत सिंह, नरेश कुमार, निरवैर सिंह, संतोख सिंह, मेहर चंद, गुरमुख दास, धर्मपाल पैंथर, किशन जस्सल, बीर सिंह अन्य सदस्य मौजूद थे।

समागम के दौरान कीर्तन करता हुआ रागी जत्था।