पापा ने चाहा और मैंने आईएएस बनकर दिखाया
हरबच्चेका पहला हीरो उसका पिता होता है। पिता की प्रेरणा से ही वह मुकाम पाता है। इस मामले में आईएएस केशव हिंगोनिया भी अन्य बच्चों की ही तरह रहे। पिता की चाहत उन्हें इस कुर्सी तक लाई जिसे कारपोरेट और लाखों के पैकेज के दौर में भी हर युवा चाहता है। लेकिन हर बच्चा पिता की चाहत पूरी नहीं कर पाता। पिता की चाहत पूरी करने के लिए संघर्ष का एक पूरा दौर जीना पड़ता है। जहां केवल लक्ष्य और लक्ष्य पर नजर होती है। आज फगवाड़ा के एसडीएम बने केशव हिंगोनिया भी कभी अपने लक्ष्य से नहीं भटके। चाहे वह कपूरथला की रेलवे कोच फैक्ट्री में बतौर सहायक मटीरियल मैनेजर का काम करने का समय हो या फिर डिफेंस रिसर्च डिपार्टमेंट में नौकरी का वक्त। उन्होंने यह बात कभी दिल से नहीं निकलने दी की पापा के लिए आईएएस बनना है।
महज 26 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले केशव सीधे जनता से जुड़ना चाहते हैं। यह बात उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान अपने सीनियर डीसी रवि भगत से सीखी है। केशव हिंगोनियाने ने आईएएस बनने से पहले 2009 में आईआईटी मुम्बई से बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने डिफेंस रिसर्च डिपार्टमेंट में सर्विस ज्वाइन की। कुछ समय बाद ही उन्होंने यह नौकरी छोड़ इंडियन रेलवे ज्वाइन किया। बतौर सहायक मैटीरियल मैनेजर उन्होंने रेलवे में अपनी ट्रेनिंग शुरू की। 2012 में केशव की ट्रेनिंग रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में थी। एक दिन जब वो रेल कोच फैक्ट्री से दिल्ली जा रहे थे ट्रेन लुधियाना पहुंची ही थी तो उनके एक दोस्त का फोन बाया कि तुम्हारा रिजल्ट आउट हो गया एंड यू हैव डन इट। केशव हिंगोनिया ने बताया कि यह सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा तथा उन्होंने पहला फोन अपने पिता जी को किया क्योंकि उनके पिता हमेशा से चाहते थे कि वो आईएएस बने। यहीं कारण था कि उन्होंने अपनी डिफेंस तथा रेलवे की नौकरी के दौरान भी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी जारी रखी।
एस साल तक मंसूरी में ट्रेनिंग के बाद केशव को पंजाब कैडर मिला। इसके बाद वे एक साल तक अमृतसर में सहायक कमिश्नर के अंडर ट्रेनिंग रहे। जहां उन्होंने डीसी रवि भगत से दफ्तरी काम काज तथा पब्लिक डीलिंग का तरीका सीखा। 28 अगस्त 2014 को केशव हिंगोनिया की पहली पोस्टिंग फगवाड़ा में बतौर एसडीएम हुई।
एसडीएम केशव हिंगोनिया मुंबई से आईआईटी करने के बाद आरसीएफ में बतौर इंजीनियर भी नौकरी की है। -भास्कर