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मेंबरशिप रिन्यू कराने पर संस्कृत काॅलेज में हुई बहस

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Dainik Bhaskar

Apr 01, 2016, 02:05 AM IST
मेंबरशिप रिन्यू कराने पर संस्कृत काॅलेज में हुई बहस
{पूर्व प्रधान तिवाड़ी साथियों सहित जमे तो मौजूदा प्रधान गोयल ने भिजवाई रसीदें

पॉलिटिकलरिपोर्टर|खन्ना

उत्तरभारत के प्रतिष्ठित संस्कृत काॅलेज श्री सरस्वती संस्कृत कॉलेज की मेंबरशिप को रिन्यू कराने को लेकर वीरवार को कॉलेज परिसर में काफी बहस हुई। दो दिन पहले रिन्यू की फीस और फार्म जमा कराने के बावजूद उसकी रसीद नहीं मिलने से खफा पूर्व मैनेजमेंट प्रधान अशोक तिवारी अपने साथियों पार्षद जसवीर सिंह काली राव और गगनदीप काली राव के साथ काॅलेज में पहुंचे। इस दौरान उनकी काॅलेज के अकाउंटेंट बलविंदर सिंह से भी काफी बहस हुई। हालांकि, बाद में रसीदें उन्हें दे भी दी गईं।तिवारी ने बताया कि 29 मार्च को वे 21 सदस्यों की मेंबरशिप रिन्यू कराने के लिए 23 हजार 100 रुपए (1100 प्रति मेम्बर) देकर गए। उस वक्त अकाउंटेंट ने बताया की रसीद बुक मैनेजमेंट सेक्रेटरी द्वारका दास के पास है। रसीद उन्हें भेज दी जाएगी। दो दिन बाद भी रसीद मांगने के बावजूद नहीं मिलने पर वे कालेज पहुंचे तो उन्हें फिर अकाउंटेंट की तरफ से वही जवाब मिला। तिवारी के अनुसार एक रसीद बुक अकाउंटेंट के टेबल पर ही रखी थी, उस बारे में पूछने पर जवाब मिला कि रिन्यू की रसीदों के लिए अलग बुक रखी गई है।इस पर तिवारी और उनके समर्थक अड़ गए। उन्होंने साफ किया कि अब ना तो रसीद के बिना वे यहां से जाएंगे और ना ही अकाउंटेंट को कहीं जाने देंगे। तिवारी ने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों की मेंबरशिप कौंसिल कराने की नियत से यह चाल चली गई थी। उधर, प्रधान गोयल ने सफाई दी कि सेक्रेटरी द्वारका दास कहीं बहर गए हुए थे। रसीदें पहले ही काट दी गई थी। बस सेक्रेटरी से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इसमें कोई चाल नहीं थी। संपर्क होते ही रसीदें दे दी गई।

अकाउंटेंट के आफिस में डेरा जमाए बैठे पूर्व प्रधान अशोक तिवारी और उनके समर्थक।

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