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वीसी अरोड़ा पर 10 तक पीटीयू संबंधी बड़े फैसले लेने पर रोक
पंजाबटेक्निकल यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. रजनीश अरोड़ा को 10 अक्टूबर तक पीटीयू के मसले में कोई भी बड़ा फैसला लेने पर बुधवार को हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। पीटीयू के पूर्व सीनियर डीन डॉ. एनपी सिंह ने खंडपीठ के सामने पीटीयू बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के फैसले को चैलेंज करते हुए याचिका डाली थी। इस पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया। अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी।
डॉ. एनपी सिंह ने कैनेडा से फोन पर बताया कि मैंने हफ्ता भर पहले याचिका लगाई थी। इस पर यह फैसला आया है। डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि 23 दिसंबर, 2008 को जीएनडीयू के प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. रजनीश अरोड़ा पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बने थे। तीन साल की डेपुटेशन पर आए डॉ. अरोड़ा के पास टीचिंग का अनुभव नहीं था। हालांकि उस वक्त वीसी के लिए टीचिंग का अनुभव होना अनिवार्य नहीं था। 2010 में यूजीसी की वीसी एलिजिबिलिटी के लिए गाइडलाइन जारी हुईं कि वीसी की योग्यता में किसी यूनिवर्सिटी में 10 साल का टीचिंग अनुभव भी शामिल होना जरूरी है। यूजीसी की गाइडलाइन्स की अनदेखी करते हुए राज्य सरकार ने तीन साल बाद 2011 में वीसी डॉ. अरोड़ा को तीन साल की और एक्सटेंशन दे दी। जनवरी 2013 में डॉ. अरोड़ा के वीसी बनने की योग्यता पर हाईकोर्ट में डॉ. सिंह ने याचिका के जरिए सवाल उठाया था।
हाईकोर्ट ने मामला पीटीयू बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को सौंप दिया। उस समय चीफ सेक्रेटरी राकेश सिंह बोर्ड के चेयरमैन थे। पीटीयू बोर्ड ने डॉ. अरोड़ा को क्लीन चिट दे दी थी।