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तहसील विभाग का मुलाजिम ही नहीं है शिकायतकर्ता नाजर
खन्ना|शुक्रवार कोखन्ना तहसील मुलाजिम से बैंक जाते वक्त की गई लूट की कोशिश में मामला कुछ गड़बड़ दिखाई पड़ने लगा है। हालांकि, पुलिस ने पर्चा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन लूट के शिकार को बदल दिया है। चर्चा जोरों पर है कि जिससे लूट की कोशिश हुई थी, वो महकमे का मुलाजिम ही नहीं था।गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह 11 बजे खन्ना तहसील परिसर के पास ही नाजर सिंह जब बैंक में तहसील का करीब सवा लाख रुपया जमा कराने जा रहा था, तो ईएसआई डिस्पेंसरी के पास किसी ने उसकी आंखों में मिर्च पाउडर फेंका। नाजर सिंह के चिल्लाने से लुटेरा भाग गया। वारदात के बाद नाजर ने खुद पत्रकारों को आपबीती सुनाई, लेकिन उसकी ये आपबीती बाद में महकमे ने बदल डाली। जब शुक्रवार शाम को पर्चा दर्ज हुआ, तो उसमें शिकायतकर्ता नाजर सिंह की जगह रजिस्ट्री क्लर्क गुरप्रीत सिंह को बना दिया गया। सूत्रों अनुसार असलियत में नाजर सिंह महकमे का मुलाजिम ही नहीं है, लेकिन सालों से बैंक का कैश वही जमा कराने जाता रहा है। नाजर सिंह किसी गांव का चौकीदार बताया जाता है। अब महकमे ने मामले में लूट की कोशिश का शिकार तो गुरप्रीत सिंह को बता दिया, लेकिन नाजर सिंह का भी उसके साथ होना बताया जा रहा है। तहसीलदार दर्शन सिंह सिद्धू ने बताया कि गुरप्रीत और नाजर वारदात के समय इकट्ठे थे। अब सवाल ये है कि जब नाजर मुलाजिम ही नहीं है, तो वह क्लर्क के साथ पैसे जमा कराने भी क्यों जा रहा था। एएचओ सिटी रजनीश सूद ने भी तहसीलदार की तरह ही नजर सिंह के गुरप्रीत सिंह के साथ होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा की मिर्च भी नाजर सिंह के आंखों में डाली गई। हैरानी की बात है की नाजर सिंह के हाथ में कैश नहीं था, फिर भी लुटेरे ने हमला उसपर बोला। रजिस्ट्री क्लर्क का पैदल ही बैंक में कैश जमा कराने जाना भी कई सवाल खड़े करता है।