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आप के तटस्थ रहने पर पड़ सकता है असर

6 वर्ष पहले
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आमआदमी पार्टी की ओर से नगर काउंसिल चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान करने पर विपक्षी दलों के चेहरों पर मुस्कान छा गई है, जबकि आप से चुनाव लड़ने की उम्मीद लगाने बैठे लोगों के चेहरे मुरझा गए हैं। ऐसे में जहां समीकरण का अंदाजा लगाना मुश्किल है वहीं विपक्षी राजनीतिक दलों की पूरी नजर आप की वोट पर होगी। इस चुनाव में आप की वोट नतीजों को काफी प्रभावित करेगी। ऐसे में आप के नेताओं का चुनाव के दौरान रुख क्या रहेगा। क्या किसी उम्मीदवार को अंदरखाते स्पोर्ट करेंगे या फिर चुप्पी बनाकर रखेंगे। हालांकि आप का कोई भी समर्थक पार्टी अनुशासन के चलते पार्टी के खिलाफ कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। राजनीतिक दलों ने आप के मतदाताओं पर अपना हक जताना शुरू कर दिया है।

आप के नगर काउंसिल चुनाव नहीं लड़ने से विपक्षी दलों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि दिल्ली चुनाव में विपक्षी दलों को करारी हार देने के बाद देश भर में आप का ग्राफ काफी ऊपर गया है। मंगलवार को शहर में भी आप की जीत की चर्चा पूरे दिन चलती रही। आप का नहीं लड़का विपक्षी दलों के लिए लाभदायक है।

शिअद-भाजपा के साथ जाएगी आप की वोट

^आप चुनाव नहीं लड़ेगी तो आप की वोट शिअद-भाजपा के खाते में जाएगी। लोग विकास के नाम पर वोट करेंगे। शिअद-भाजपा ने बहुत विकास करवाया है। प्रकाशचंद गर्ग, सीपीएस

कांग्रेस के सिवाय कोई विकल्प नहीं

^शहरकी जनता अकाली-भाजपा के राज से पूरी तरह से दुखी है। ऐसे में जनता के पास कांग्रेस के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। सुरिन्द्रपालसिंह सीबिया, पूर्व विधायक और प्रदेश उप प्रधान, कांग्रेस

ईमानदार आजाद उम्मीदवार आप दे सकती है समर्थन

^भलेही आप काउंसिल चुनाव खुद नहीं लड़ेगी परंतु लोगों की भावनाओं को देखा जाएगा। यदि आप को लगेगा कि वार्ड से साफ छवि और ईमानदार आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है तो पार्टी उसको समर्थन दे सकती है। भगवंतमान, सांसद, आप

संगरूर लोकसभा चुनाव में आप ने 5,33,237 वोट जीत प्राप्त करके इतिहास कायम किया था। इससे पहले कभी कोई राजनीतिक दल लोकसभा में इतने वोट हासिल नहीं कर पाया था। ऐसे में आप ने सभी को चकित कर दिया था। संगरूर लोकसभा की छह विधानसभा में से लहरागागा को छोड़ कर आप सभी हलकों से आगे रही थी। जिसका शहरी वोट पर भी काफी असर पड़ा था।