किसानों, मजदूरों ने निकाला रोष मार्च
भारतीयकिसान यूनियन एकता उग्राहां पंजाब खेत मजदूर यूनियन के आह्वान पर किसानों, मजदूरों महिलाओं ने मंगलवार को शहर में रोष मार्च करने के बाद जिला प्रबंधकीय परिसर के समक्ष धरना दिया। जिला प्रधान अमरीक सिंह गंढूआं हरभगवान सिंह मूनक की अगुवाई में जुटे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके जमकर भड़ास निकाली।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की मांगों को अनदेखा कर रही है। मौके पर भाकियू के राज्य प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार विभिन्न कानूनों में संशोधन करके कारपोरेट घरानों के हितों की पूर्ति करने में लगी हुई है। किरत कानूनों, जंगली सुरक्षा कानून, कोयला खानों का वितरण, बैंकों में सीधा विदेशी निवेश, प्रचून क्षेत्र में सीधी विदेशी पूंजी निवेश, भूमि अधिग्रहण एकट, इन सब में केंद्र सरकार कारपोरेट घराणों के पक्ष में खड़ी होकर किसान, मजदूर, मुलाजिम छात्र विरोधी फैसले ले रही है। वहीं पंजाब सरकार किसानों, मजदूरों की स्वीकृत मांगों को लागू करने से भाग रही है।
धरने को दरबारा सिंह छाजला, जनक सिंह भूटाल, दिलबाग सिंह हरीगढ़, जसविंदर सिंह लौंगोवाल, मानक सिंह कणकवाल, हरपाल सिंह पेधनी, श्याम दास कांझली, अजैब सिंह, जगतार सिंह, दर्शन सिंह, मलकीत सिंह, बहाल सिंह, दर्शन सिंह, जसवंत सिंह, रामशरण सिंह, करनैल गनौटा, गोपी सिंह, होशियार सिंह, हरबंस सिंह ने संबोधित किया।
संगरूर: धरने को संबोधित करते हुए जोगिंदर सिंह उगराहां।
लोगों की यह हैं मांगें
विशालधरने के दौरान मजदूर नेता हरभगवान सिंह मूनक ने कहा कि सरकार अपने वायदे के अनुसार मजदूरों को 10-10 मरले के प्लाट दे मजदूरों को मालकी हक दे, आत्महत्या पीडि़त परिवारों को 5 लाख रुपए मुआवजा, दोबारा नए सिरे से आत्महत्याओं का सर्वे करवाया जाए, किसान-मजदूर पक्षीय कर्ज कानून तुरंत अमल में लाया जाए, भूमि अधिग्रहण एकट में संशोधन का आर्डिनेंस रद्द किया जाए आदि मांगें पूरी की जाएं।