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समस्त ग्रंथों का निचोड़ है श्रीमद् भागवत : चित्रलेखा

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | माहिलपुर

वर्ल्डसंकीर्तन टूर ट्रस्ट के तत्वावधान में प्रारंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें कथा वाचिका देवी चित्रलेखा ने सर्वप्रथम परिचय में बताया कि वहां पर भगवान की विशेष कृपा होती है, जहां पर कथा का आयोजन होता है।

विश्व की सबसे कम उम्र की श्रीमद् भागवत कथा वाचिका देवी चित्रलेखा ने अपनी अमृतमय वाणी से सभी कथा प्रेमियों को प्रथम स्कंद के प्रथम श्लोक की व्याख्या करते हुए सुखदेव जी के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि सुखदेव जी माता के गर्भ से जन्म लेते ही वन में चले गए थे। ऐसे सर्वभूत श्री सुखदेव जी को स्त्री और पुरुष के अंतर भी नहीं पता था। जब उनके पिता श्री वेद व्यास जी उनसे मिलने के लिए जंगल मे गए, तो पेड़ों ने उनसे कहा कि आप किसके पुत्र हैं? श्री वेद व्यास जी जिन्हें आप पुत्र बता रहे हो वह कभी आप का पिता था।

ऐसे शब्दों को सुनकर वेद व्यास जी को ज्ञान हो गया और सुखदेव जी के बिना साथ लिए लौट आए। आगे के प्रसंगों के माध्यम से परीक्षित जी के जन्म कथा का वर्णन किया। परीक्षित जिनकी भगवान ने गर्भ में ही रक्षा की थी।

कुंति स्तुति, भीष्म स्तुति, राजा परीक्षित के राजदरबार में सुखदेव जी का आगमन, संधु मुक्ति का वर्णन आदि कथाओं को सुनाकर हरिनाम कीर्तन के साथ पहले दिन की कथा को विश्राम दिया।

श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन कथा वाचन करतीं देवी चित्रलेखा।

भास्कर संवाददाता। माहिलपुर।

कथावाचक चित्रलेखा द्वारा श्रीमद्भागवत कथा के प्रारंभ होने के अवसर पर सुबह कलश यात्रा निकाली गई बाबा बर्फानी लंगर सेवा समिति, प्रचीन शिव मंदिर और राधाकृष्ण मंदिर कमेटी के सहयोग से दिलबाग राय के अक्की देवी ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस कथा ज्ञान यज्ञ के लिए प्रचीन शिव मंदिर से कलश यात्रा प्रारंभ हुई जो फगवाड़ा रोड से होते हुए जेजों रोड से दिलबाग राय ग्राउंड में बने पंडाल में पहुंची। यहां श्रीमद्भागवत जी को बड़े ही आदर और श्रद्धा के साथ पंडाल तक लाकर विधिवत स्थापित किया गया। इस दौरान बैंड बाजों की धुन पर भजन करते श्रद्धालु श्रद्धा भाव के साथ कथा स्थल तक पहुंचे। इस मौके पर डॉ दिलबाग राय, डॉ परमजीत कौर राय, पिंकी प्रधान आदि उपस्थित थे।

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