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भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं भगवान

7 वर्ष पहले
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श्रीमद्भागवत कथा सुनने और संकीर्तन करने वाले भक्तों की रक्षा के लिए भगवान सदैव तत्पर रहते हैं। इन शब्दों का प्रकटावा आचार्य श्री रमेशानंद जी महाराज ने श्री खाटू श्याम मंदिर में चल रही संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए किया।

उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ही ऐसा साधन है जो मनुष्य को सहजता से संसार रूपी भवसागर के पार उतारता है। जो भगवान भरोसे रहता है, उसका पालन स्वयं भगवान करते है। पांडवों ने पूरी निष्ठा के साथ सत्य के मार्ग पर चलते हुए भगवान का भजन किया। तभी तो भगवान की कृपा से पांडवों ने बड़ी सहजता से महाभारत युद्ध को जीत लिया।

उन्होंने कहा कि जब-जब पांडवों के ऊपर कोई आपत्ति-विपत्ति आई, तो पांडवों ने भगवान को अपने पास ही पाया। तभी तो कुंती ने भगवान से वरदान में संसार के सभी सुखों को छोड़कर केवल दुख ही मांगा और कहा कि यदि दुख की घड़ी में भगवान हमारे निकट होते हैं, तो हम सुख लेकर क्या करेंगे। इससे प्रसन्न होकर भगवान ने स्वयं को ही कुंती को समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि जब जीव भगवान से कुछ नहीं मांगता, तो भगवान अपने आप ही सब कुछ दे देते है। आज तक भगवान को जिस किसी ने पाया। भक्ति मार्ग पर चल कर ही पाया। जो साधक ज्ञान मार्ग में चलकर भगवान तक पहुंचना चाहता है, उस साधक को गिरने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि जैसे बंदर अपने बच्चों को साथ लेकर वृक्ष के एक डाल से दूसरी डाल पर छलांग लगाता रहता है। माँ को भी यह चिंता नहीं रहती कि मेरा बच्चा गिर सकता है, बल्कि बंदर के बच्चे को स्वतः की चिंता करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह ज्ञान मार्ग पर चलने वाले साधक को स्वयं की चिंता करनी पड़ती है। भगवान उसकी चिंता नहीं करते। उन्होंने भक्ति मार्ग का उदाहरण देते कहा कि जैसे बिल्ली जिस मुंह से बड़े-बड़े चूहे को खा जाती है, उसी मुख से दबाकर अपने बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है। इसी प्रकार जो साधक भक्ति मार्ग का आश्रय लेते हैं। वह भगवान तक बड़ी ही आसानी से पहुंच जाते हैं। क्योंकि भगवान स्वयं अपने भक्त का मार्ग प्रकाशित करते हैं। भगवान अपने भक्तों की रक्षा उसी प्रकार करते हैं, जैसे एक मां अपने बच्चे का ध्यान रखती है।(विजय कुमार)

स्वामी रमेशानंद जी प्रवचन देते हुए।

मौड मंडी में चल रही भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।