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किचलू स्कूल में मार्स मिशन की बधाई दी

7 वर्ष पहले
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डा.सैफुद्दीन किचलू पब्लिक स्कूल में बुधवार को मार्स मिशन मंगल यान कामयाब होने पर छात्राओं अध्यापकों की ओर से समागम का आयोजन करके वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दी गई। इसकी शुरुआत स्कूल चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग ने की। उन्होंने कहा कि मार्स मिशन मंगल यान में भारत एशिया का पहला और दुनिया का चौथा देश है। चीन और जापान जैसे देश इस मिशन में सफलता पाने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान स्कूल की साइंस अध्यापक अनुपम शर्मा, दलजीत कुमार, दलवीर सिंह, अभिनंदन स्याल, अमित मदान, अलका कालड़ा, मिल्ली, गुरप्रीत कौर, विपिन कुमार, कृतिका, कमलप्रीत कौर, रेणु गुप्ता आदि अध्यापकों ने स्टूडेंट्स से कहा कि मंगल ग्रह पर मंगल यान अभियान का कुल बजट 450 करोड़ रुपये है। यह मंगल अभियान दुनिया के सबसे किफायती मशीनों में शुमार रखता है। इसकी लागत अमेरिका के मंगल मिशन से 10 गुणी कम है। यह अंतरिक्ष यान एल्मोनियम और कार्बन फाइबर से बना है। इसका कुल वजन 1350 किलोग्राम है। इसमें किसी भी विदेशी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी वैज्ञानिक उपकरणों से मंगल सतह का अनवेशण, आकृति जमीनी संरचना, खनिज संपदा और वातावरण का अध्ययन करना है। स्कूल के डीन मलकीत सिंह ने विद्यार्थियों को बताया कि आज का दिन भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम दिन है और भारत में दुनिया के सामने अपनी विज्ञान शक्ति का प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया है कि भारत दुनिया में ऐसा पहला वैज्ञानिक देश है। (शिवा)

किचलू स्कूल में वैज्ञानिकों को बधाई देते छात्र।