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सुख-दुख जीवन के दो पहलु: त्रिपाठी

6 वर्ष पहले
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सुखऔर दुख जीवन के दो पहलु है। सुख में ज्यादा खुश और दुख में घबराना नहीं चाहिए। बल्कि दोनों समय परमात्मा के नाम का सिमरन करना चाहिए। यह शब्द गीता भवन में जारी 46वें सर्वधर्म संभव संत सम्मेलन में वृंदावन धाम से पधारे भागवत आचार्य डा. रामकृपाल त्रिपाठी ने कहे।

उन्होंने कहा कि परमात्मा का आशीर्वाद सदैव हमारे सिर पर रहता है। बल्कि हमारे कर्मों अनुसार हमारे जीवन में सुख दुख आते रहते हैं। गीता भवन के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी सहज प्रकाश ने कहा कि बचपन से ही माता-पिता को अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा का ज्ञान देना चाहिए। ताकि बड़ा होकर बच्चा भारतीय संस्कृति को बचा सके। भोपाल से पधारी साध्वी प्रज्ञा भारती ने रामायण की चौपाइयों के साथ सत्संग में श्री राम की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि हमें भी भगवान राम के आदर्श जीवन को आधार बनाकर उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। जम्मू से पधारे भजन सम्राट स्वामी बुआ दत्ता जी ने जिसको जीवन में मिला सत्संग है उसके जीवन में आनंद ही आनंद है। भजनों से भक्ति रस बिखेरा।

इस दौरान हरिद्वार से पधारे संत महापुरुषों की अगुवाई में यजमानों ने शतचंडी महायज्ञ में आहुतियां डाली। इस अवसर पर एडवोकेट बोधराज मजीठिया, एडवोकेट सुनील गर्ग, दर्शन सिंगला, नरेश गोयल, बाल कृष्ण गोगी, शिव टंडन, बलदेव राज लुथरा, धर्मपाल मित्तल, पवन अग्रवाल, भगवान दास गुप्ता, प्रवीन गर्ग, सुबोध जिंदल, महिंदर जिंदल, मोहनी जिंदल, सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।(शिवा)

गीता भवन में सर्वधर्म समभाव सम्मेलन में प्रवचन करते डा. रामकृपाल त्रिपाठी, स्वामी सहज प्रकाश और उपस्थित श्रद्धालुगण।