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सरकार नहीं मानी तो खुद करवाएंगे यादगार तैयार
एकतरफ जब शहीद आजम भगत सिंह पार्क में उनके जन्म दिवस के समारोह मनाए जा रहे थे तो इसी बीच यहीं से दो सौ मीटर की दूरी पर स्वतंत्रता सेनानियों की यादगार अपने आप पर आंसू बहा रही थी। सीनियर अकाली नेता और जिला प्रशासनिक अधिकारी पार्क में भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने तो पहुंचे मगर किसी ने देश के लिए शहीद होने या संघर्ष करने वाले सेनानियों की यादगार पर जाने की तकलीफ नहीं की।
तीन दशक पहले बनी इस यादगार में तीन हजार के करीब स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित यादें जुड़ी हुई हैं और अब रख रखाव नहीं होने के कारण खराब हो रही हैं। इसे दोबारा से बनाने के लिए तीन मंजिला इमारत का प्रोपोजल डेढ़ साल पहले बना थी मगर अभी तक कोई काम नहीं हो सका है। अब जब स्वतंत्रता सेनानियों ने धमकी दी है कि अगर यादगार नहीं बनाई गई तो वह संघर्ष करेंगे और इसका निर्माण भी खुद करवाएंगे। तो विधायक जोगिंदरपाल जैन ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से बात कर इसे जल्द बनाने की मांग उठाई है। विधायक का कहना है कि किसी ने इससे पहले इतने प्रभावी ढंग से इसे मुख्यमंत्री के पास नहीं रखा था। प्रोपोजल तैयार कर मुख्य मंत्री को दी दिया है और उन्होंने इसके लिए 46 लाख रुपए जल्द देने का वादा भी किया है। जबकि स्वतंत्रता सेनानियों की संस्था के अध्यक्ष गुरचरण सिंह संघा का कहना है कि हमने काम शुरू कर दिया है। अगर जल्द ही पैसे नहीं आए तो वह इस यादगार को खुद बनाएंगे।
बेशकीमतीयादें संजोए हुए है यह इमारत : तीनदशक पहले बने इस यादगारी हाल में तीन हजार स्वतंत्रता सेनानियों की यादें हैं, हॉल की हालत बेहद खस्ता हो गई है। हालात यह हैं कि इसकी छत कभी भी गिर सकती है। अगर छत गिरी तो स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें और दूसरी वस्तुएं इसके मलबे में दब जाएंगी।
1979में बनी थी यादगार
नेशनलहाईवे 95 पर स्थित 1979 में यहां की शहीद भगत सिंह मार्केट में स्वतंत्रता सेनानियों की याद में हॉल बनाया गया था। जिसके लिए सरकार की ओर से उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जगह भी दी थी। 1 कनाल 8 मरले जगह में एक हॉल और कुछ कमरे बने हुए हैं, जिसमें पुराने फिरोजपुर जिले जिसमें मोगा, फरीदकोट और फिरोजपुर के करीब तीन हजार स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें, उनके हस्तलिखित दस्तावेज, जीवनी और अन्य सामान रखा हुआ है। यह सामान जगह नहीं होने के कारण