पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • राजनेता बने निगम के राजस्व में रोड़ा

राजनेता बने निगम के राजस्व में रोड़ा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राजनेताचुनावों में शहर के वोटरों को लुभाने के चक्कर में निगम के करोड़ों रुपए के राजस्व में रोड़ा बने हुए हैं। नगर निगम में इन दिनों हाउस टैक्स नहीं लिया जा रहा है और दुकानों के सर्विस टैक्स को लेकर भी निगम सुस्त पड़ गया है। यही नहीं शहर में बिना नक्शा पास बनी इमारतों का निगम ने सर्वे तो करवा लिया, मगर इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही।

यही नहीं बाजार से अतिक्रमण हटवाने के लिए पुलिस के साथ मिलकर की चलाई गई मुहिम भी ठंडी पड़ गई है। नगर निगम के अधिकारिक सूत्रों की मानें तो सत्ता पक्ष के लीडरों ने निगम के अफसरों को चुनाव तक शांति बनाए रखने के लिए कहा है। नगर निगम कमिश्नर के सख्त रवैये से लोग कम नेता ज्यादा परेशान लग रहे हैं। यही कारण है कि एक बार तो कमिश्नर विपुल उज्जवल की बदली तक करवा दी गई।

अवैधइमारतों का सर्वे तो करवाया मगर कार्रवाई नहीं : सितंबरमें लोकल बॉडीज मंत्री के साथ अधिकारियों के बैठक के बाद पूरे शहर में अवैध ढंग से बिना नक्शा पास करवाए बनाई गई इमारतों का सर्वे करवाया गया। मगर अवैध तौर पर इमारतें बनाने वालों पर कोई कार्रवाई नहींं की है। निगम ने इन लोगों को बचाने के लिए समाजसेवी सुरेश सूद की ओर से मांगी गई आरटीआई में जानकारी भी जानबूझकर अधूरी दी है। निगम ने पुरानी वार्डबंदी के हिसाब से 31 वार्डों में सर्वे किया था। इस दौरान 60 फीसदी में भी ज्यादा ऐसी इमारतें पाई गई हैं, जिनके नक्शे ही पास नहीं थे। यह जानकारी देने के फोटो स्टेट किए गए पेज आधे अधूरे फोटो स्टेट करवाकर दिए गए हैं, ताकि आईटीआई कर्ता कोर्ट में सही जानकारी दे सके। बहुत से लोगों को बचाने के लिए सर्वे में कहा गया है कि मौके पर नक्शा पास नहीं था। अगर निगम इन पर कार्रवाई करता है तो करोड़ों का राजस्व सकता है।

नोटिसजारी किए, आधे पैसे भी मिले : निगमकी ओर से व्यापारिक जगहों का सर्विस टैक्स नहीं चुकाने वालों को नोटिस जारी किए गए थे। आधे पैसे तो गए हैं मगर सख्त एक्शन किसी के खिलाफ भी नही लिया गया है। विभाग के करोड़ों रुपए इस सर्विस टैक्स में अटके हुए हैं।

बड़े अधिकारी-कर्मचारी तैनात, मगर राजस्व नहीं

नगरनिगम में दो माह में एक दर्जन से भी ज्यादा छोटे-बड़े अधिकारी और कर्मचारी तैनात कर दिए गए हैं, जिससे निगम में बजट काफी बिगड़ गया है। निगम के पास राजस्व के साधन बेहद सीमित हैं और वेतन पर पैसा ज्यादा खर्च