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डॉ. ग्रोवर ने परमार्थ को किया जीवन समर्पित
आंधियोंके रुख पे जो जलते हुए रह जाएंगे वो चिराग हर दौर में खुद रहबर कहलाएंगे उर्दू के शायर आलम कुरैशी द्वारा लिखित इन पंक्तियों के रहबर ही थे कोटकपूरा के डाक्टर ओम प्रकाश ग्रोवर। कुष्ठ रोगियों के निरोग बच्चों की संभाल के लिए स्थापित निरोग बाल आश्रम की स्थापना समेत स्वयंसेवा के क्षेत्र में किए गए उनके अन्य निष्काम प्रय|ों के लिए आज उनकी मृत्यु के दस साल बाद भी कोटकपूरा में उनका नाम श्रद्धा भाव से लिया जाता है।
कभीआर्थिक हितों को नहीं दी प्राथमिकता : 16अप्रैल 1919 को जिला मोगा के फतहगढ़ पंजतुर में जन्में डॉ. ओम प्रकाश ग्रोवर अपने समय में बेशक कोटकपूरा के जाने माने चिकित्सक थे लेकिन उन्होंने अपने इस ज्ञान कार्य का उपयोग जिंदगी में कभी भी अपने आर्थिक हितों के लिए नहीं किया। वे अपने जवानी के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे जिस के चलते वर्ष 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद इन संगठनों पर बंदिश लगने के कारण उन्हें अपने साथियों के साथ करीब आठ महीने के लिए जेल भी जाना पड़ा। वर्ष 2005 की नौ फरवरी को उनका बीमारी के बाद स्वर्गवास हो गया। उन्होंने जहां राम बाग का निर्माण करवाया वहीं गुरु गोबिंद सिंह ट्रस्ट की स्थापना की।
लाला लाजपत राय पार्क
नगरकाउंसिल के पास स्थापित लाला लाजपत राय पार्क भी डाक्टर ओम प्रकाश ग्रोवर का ही स्वप्न था जिसकी आधारशिला उन्होंने कोटकपूरा के अन्य स्वयंसेवकों के साथ मिलकर रखी और आज यह स्थल विकसित होकर कोटकपूरा की शान बन चूका है।
निरोग बाल आश्रम
मुक्तसररोड पर स्थित निरोग बाल आश्रम की स्थापना में डाक्टर ओम प्रकाश के योगदान ने उन्हें क्षेत्रवासियों के दिलों में अमर कर दिया। आज इस आश्रम में देशभर से आए करीब एक सौ बच्चों का निशुल्क पालन पोषण हो रहा है सैकड़ों बच्चे आश्रम के खर्च पर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
स्वर्गीय डाक्टर ओम प्रकाश ग्रोवर
स्वर्गीय ओम प्रकाश ग्रोवर के प्रय|ों से स्थापित निरोग बाल आश्रम