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जमींदार के खेतों में दवा छिड़कने गए मजदूर की दुष्प्रभाव से मौत

6 वर्ष पहले
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जमींदारके खेत में स्प्रे करने गए मजदूर की दवा के दुष्प्रभाव से हालत बिगड़ गई। उसे दूसरे मजदूरों ने बाघापुराना के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां शनिवार सुबह करीब 11 बजे मौत हो गई। गांव नथोके निवासी तेजा सिंह और चमकौर सिंह ने बताया कि 38 वर्षीय बूटा सिंह पुत्र मोदन सिंह 4 लड़कियों और दो लड़कों का पिता था। वह शुक्रवार को गांव के जमींदार बलदेव सिंह के खेतों में फसल पर दवा छिड़कने के लिए गया था।

रोषजताने पर जमींदार को देने पड़े पैसे

बूटासिंह की मौत के बाद जमींदार परिवार ने उसके परिजनों को किसी तरह की सहायता देने से साफ इंकार कर दिया था। इसके चलते मृतक के परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों में रोष फैल गया। मृतक बूटा सिंह के चाचा तेजा सिंह भाई चमकौर सिंह ने आरोप लगाया है कि मामला थाना बाघापुराना पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस भी जमींदार का पक्ष ले रही थी। इसके बाद मजबूर होकर उन्होंने लाश को कस्बा बाघापुराना के मेन चौक में रखकर धरना देने की बात कहीं। तब जमींदार ने मृतक के परिजनों से बात की और एक लाख 40 हजार रुपए में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाश का रविवार की दोपहर को पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया।

बड़ीबेटी को देखने आने वाले थे रिश्तेदार

दूसरीओर मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि वह अपनी बड़ी बेटी की शादी करने की तैयारी में था। इसी के चलते रविवार को गांव किशनपुरा कलां से लड़के वालों ने उसकी बेटी को देखने के लिए आना था। वह सोचता था कि अगर लड़के वालों को उसकी बेटी पसंद गई तो वह उसी दिन बेटी की शादी करके विदाई कर देगा। किसे पता था कि बेटी की शादी करके विदा करने की बजाए बूटा सिंह खुद इस दुनिया से विदा हो जाएगा।

हवलदार नछतर सिंह का कहना है कि सुनने में आया था कि मृतक की मौत के बाद परिजन जमींदार से 7-8 लाख रुपए मांग रहे थे। बाद में कितने में समझौता हुआ है। इस बारे में उनको जानकारी नहीं है। मृतक 4 बेटियों का पिता था, परिवार वाले उनकी शादियों के लिए रुपए मांग रहे थे।