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लक्ष्मण मूर्छा का दृश्य देख दर्शकों की आखों से छलक पड़े आंसू

7 वर्ष पहले
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आंखोंके मेरे तारे, रोता है वीर तेरा, मेरे लखन प्यारे, अयोध्या में जाकर क्या मुख दिखाऊंगा, पूछेंगे भरत-शत्रु लखन कहां छोड़ आए हो, रो रो के आंखों से आंसू सूख गए हैं। उठो लक्ष्मण उठो, देखो राम तुम्हे पुकार रहा है। इन शब्दों के साथ दी मोगा आर्ट्स क्लब की ओर से आयोजित पुरानी अनाज मंडी में चल रही रामलीला की 8वीं रात को मेघनाथ की ओर से लक्ष्मण को मूर्छित करने का दृश्य दिखाया गया।

इस दृश्य को देखकर रामलीला देखने आए श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू छलक रहे थे। इससे पहले रामलीला के मंच पर समाज सेवी राकेश गौतम ने भगवान राम के दरबार में ज्योति प्रचंड, निशि मनचंदा ने ध्वजारोहण और राइस ब्रान डीलर्स एसोसिएशन की ओर से मंच का शुभारंभ किया गया। रामलीला में भगवान राम की ओर से अंगद को रावण के दरबार में दूत बनाकर भेजना, अंगद का रावण के दरबार में जाकर दहाड़ना, माता सीता को वापस लौटाने को कहना, वहीं रावण की ओर से अरे वानर तुझे पता है, तूं किससे बात कर रहा है मैं रावण हूं, मेरे नाम से देवता भी कांपते है, तूने लंका में आकर अपनी मौत को बुलावा दिया है का मंचन किया गया।

वहीं अंगद का रावण के दरबार में पैर जमाना, लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध, रावण की ओर से कुंभकरण को गहरी निंद्रा से उठाना आदि दृश्य दिखाए गए। रावण दूारा कुंभकरण को समय से पहले उठाने पर उनके मनोरंजन के लिए अप्सराओं को बुलाना दरबार में आकर खुद ठुमके लगाना आदि दृश्य भी दिखाए गए। रामलीला के अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि रामलीला का समापन रावण-युद्ध के बाद भगवान राम को राज तिलक के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर राज कमल कपूर, सुबोध जिंदल, प्रेम जिंदल, मोहन गोयल, नवीन सिंगला, सुनील गर्ग, तेजभान जिंदल, लोकेश लक्की, विनय शर्मा, गगनदीप मितल, कश्मीरी लाल जिंदल आदि उपस्थित थे। (शिवा)

गीतों पर ठुमके लगाकर कुंभकरण को आनंदित करता रावण।

कुंभकरण को गहरी निद्रा से उठाता लंका का राजा रावण और मेघनाथ।

मेघनाथ का बाण लगने से मूर्छित लक्ष्मण के पास विलाप करते हुए श्रीराम।