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लावारिस मृतकों को सोसायटी ने दिलाया मोक्ष

6 वर्ष पहले
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लावारिसमरने वाले लोगों के लिए मोक्ष का रास्ता बनाने में यहां की समाज सेवी सोसायटी प्रमुख भूमिका निभा रही है। जो लावारिस मर जाते हैं उनके शव को कोई संभालने वाला कोई नहीं होता, सोसायटी की ओर से ऐसे शवों का कानूनी प्रक्रिया के बाद अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। सिख और हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मोक्ष की प्राप्ति तभी होती है जब शव का विधिवत अंतिम संस्कार हो और अस्थियां विसर्जित कर दी जाएं।

पिछले साल मारे गए लोगों में से 38 की अस्थियां सोसायटी की ओर से फरीदकोट की नहरों में विसर्जित की गई हैं। सोसायटी इनके लिए अरदास भी करती है। सोसायटी के सदस्य तजिंदरपाल सिंह ने बताया कि 2014-15 के दौरान अब तक 40 अज्ञात शवों के संस्कार उनकी सोसायटी की ओर से किए जा चुके हैं। इनमें से संस्कार के बाद दो परिवारों के सदस्य अपने परिजनों की अस्थियां ले गए थे जबकि बाकी 38 का विसर्जन उनकी ओर से किया गया है। इस मौके पर कलश यात्रा में अन्य के अलावा बलविंदर सिंह, परमजीत सिंह, बलजीत सिंह, गुरनाम सिंह, हरजीत सिंह आदि हाजिर थे।

अपने पास संभालकर रखते हैं अस्थियां और राख

अगरशहर में कहीं से कोई लावारिस शव मिलता है तो समाज सेवा सोसायटी की ओर से उसका संस्कार विधिवत ढंग से किया जाता है। इसके बाद उनके अस्थियों और राख को बेहद सही ढंग से संभाल कर रखा जाता है और साल के अंत में इनका विसर्जन किया जाता है। सोसायटी इस काम के लिए समाज सेवियों का साथ लेती है।

अस्थियां प्रवाहित करने के बाद की जाती है अरदास

समाजसेवा सोसायटी के अध्यक्ष गुरसेवक संन्यासी के अनुसार फरीदकोट की ग्रीन एवेन्यू में अस्थियां जल प्रवाह करने के लिए जगह बनी हुई है। यहां पर अस्थियां जल प्रवाह करने के बाद वहां पर अरदास करवाई गई है। इनकी आत्मिक शांति के लिए सोसायटी की ओर से मार्च माह में सहज पाठ के भोग डाले जाएंगे।

लावारिस शवों की अस्थियों के साथ समाज सेवा सोसायटी के सदस्य।