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मुकेरियां में बंटवारे को लेकर साबी और शाकर आमने-सामने

6 वर्ष पहले
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चुनावका लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कुछ वार्डों में सीटों को लेकर अकाली-भाजपा गठबंधन में खटास साफ दिखाई दे रही है, जोकि आने वाले दिनों में सिरदर्द बननी तय है। वहीं अकाली-भाजपा कार्यकर्ताओं में भी तनाव का माहौल बढ़ता जाएगा। वार्ड नंबर 11 की अगर बात करें तो यहां वैसे तो सीट अकाली दल के खाते में है लेकिन पिछला चुनाव बतौर आजाद चुनाव जीतने वाले पार्षद जीवन महाजन भाजपा के सीनियर नेताओ में माने जाते हैं, पार्टी यहां से उन्हें ही सीट देने का मन बना चुकी है। वही अकाली दल सीट छोड़ने को तैयार नही है। उन्होंने भी वहां से तैयारी शुरू कर दी है। पिछले नगर कौंसल चुनाव की अगर बात करें तो सीट पर 6 लोगों ने चुनाव लड़ा था जिसमें अकाली दल से 1, कांग्रेस से 1 4 आजाद उम्मीदवार जीवन महाजन, टीआर भाटिया, गुरविंद्र साबी, कैप्टन अमरजीत सिंह चारो थे जिसमें जीवन महाजन ने जीत दर्ज की थी।

इस बार जीवन महाजन भाजपा से चुनाव जीतना चाहते है लेकिन अकाली दल सीट छोड़ने को तैयार लगती नहीं है। वही अकाली दल में शहर की वार्ड नंबर दो सीट यह सीट भी अकाली दल के पास है यहां से मनमोहन सिंह ने चुनाव जीता था लेकिन इस बार अकाली दल के दो पक्षों में इस टिकट को लेकर आपस में बंटे नजर आते है जिसमें एक पक्ष सर्बजोत सिंह साबी जोकि यूथ अकाली दल दोआबा का प्रधान है वही दूसरे पक्ष में एसजीपीसी सदस्य रविंदर सिंह चक्क है इसमें रविंद्र सिंह चक्क पक्ष मनमोहन सिंह को टिकट देने पर अड़ा हुआ है। जबकि सर्बजोत सिंह साबी मनमोहन सिंह के साथ खड़ा नजर आता है। रविंद्र सिंह चक्क मनमोहन सिंह के खिलाफ इसलिए है एसजीपीसी चुनावों के दौरान मनमोहन सिह ने रविंदर सिंह के विरुध चुनाव लड़ रहे जगजीत सिंह मनसूरपुर की मद्द की थी। इसलिए रविंदर सिंह चक्क उसके हक में नही है। वहीं दोनों गुटों के नेता अपने अपने स्तर पर पार्टी टिकट को लेकर जोरआजमाइश करते नजर रहे है जोकि अकाली भाजपा की मुश्किले खड़ी कर सके हैं।

रविंदर चक्क

सरबजोत साबी

अरुणेश शाकर