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करंसी पकड़ने के मामले में पुलिस की पोल खुली

5 वर्ष पहले
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मैहतपुरके सेल टैक्स बैरियर पर 6 फरवरी को तकरीबन 30 लाख भारतीय करंसी के साथ पकड़ी गई गाड़ी ने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस सेल टैक्स बैरियर की कार्यप्रणाली पर सवालिए निशान खड़े किए है। उधर पुलिस विभाग के डीएसपी ने अपने दूसरे कामों का हवाला देकर स्थानीय ट्रैफिक पुलिस का पक्ष रखा जबकि सेल टैक्स विभाग के ईटीओ रमेश कुमार ने इस मसले पर बात करने से इंकार कर दिया।

नाम नहीं छापने की शर्त में पुलिस कर्मचारी ने ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी महंगी गाड़ी में बौद्ध धर्म के लोगों का होना जोकि वीआईपी श्रेणी में आते हैं, की गाड़ी को रोकने का जोखिम कभी नहीं उठाती। अक्सर बड़ी गाड़ी और वीआईपी गाड़ी की तरफ तो कोई भी ध्यान नहीं देता। आगे हिमाचल पुलिस लाइसैंस और कुछ जरूरी पेपरों के साथ गहनता से गाड़ी की चैकिंग करती है। इसी चैिकंग के चलते उन्होंने पिछले दिनों उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की।

पिछले दिनों एक टैंकर में एनिमल फैट को केमिकल लिख कर एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने घनौली और उसके बाद नंगल बैरियर से पास कर दिया था पर लोगों ने इस टैंकर में एनिमल फैट होने की सूचना पर इस पकड़ लिया था। इससे साबित होता है कि दोनों ही स्थानों पर गाड़ियों की चैकिंग नहीं होती। इस बारे में दैनिक भास्कर ने खबर भी छापी थी। उसके बाद 6 फरवरी को इन दोनों बैरियरों से 30 लाख रुपए से भरी गाड़ी निकल गई जिसे आगे जाकर हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों ने पकड़ लिया। इस बारे में जब ईटीओ रमेश कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं इस मसले पर बात नहीं करना चाहता।

^हिमाचल का यह एंट्रेस प्वाइंट है। यहां गाड़ियों की चैकिंग की जाती है। उनके मुलाजिम भी कीरतपुर साहिब में इस तरह की जांच करते हैं। नंगल पुलिस को भी चैकिंग करने के लिए कहेंगे। -संतसिंह धालीवाल, डीएसपी

महंगी और वीआईपी गाड़ियों को चैक नहीं किया जाता

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