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नवांशहर जिला बनने के बाद बहुत कुछ बदला पर नहीं मिली ट्रैफिक से निजात

7 वर्ष पहले
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7 नवंबर 1995 को नवांशहर को मिला था जिले का दर्जा

अमितशर्मा | नवांशहर

नवांशहरकोजिले का दर्जा मिले 19 साल पूरे हो गए। आज यह 20वें साल में प्रवेश कर गया। इस अर्से के दौरान शहर में बहुत कुछ बदला।शहर का नाम भले ही बदला हो, लेकिन जिले का नाम 2008 में नवांशहर से बदलकर शहीद भगत सिंह नगर हो गया। बारादरी पार्क की हालत सुधरी, नया अस्पताल बना, आईटीआई मैदान को स्टेडियम का रूप दिया गया, कोआप्रेटिव बैंक की नई इमारत बनी, जिला कचहरियां बनीं, एसएसपी और डीसी दफ्तर बने। लेकिन उद्योगों के स्थापित होने को लेकर लोगों ने जो उम्मीद जताई थी, वह पूरी नहीं हो पाई, कई दफ्तर 19 साल बाद भी किराए के दफ्तरों में चल रहे हैं। रोडवेज डिपो की हालत पहले से भी बदत्तर हो गई। इन 20 साल में शहर में सबसे बड़ा बदलाव ट्रैफिक लेकर आया। शहर के इतिहास को देखें तो 1807 ई. तक नवांशहर एक छोटे से गांव से ज्यादा नहीं था। गांव भी ऐसा जो अपनी हर जरूरत के लिए कस्बा राहों पर निर्भर था। राहों उस समय तक डल्लेवालिया मिसल के तारा सिंह गैबा की राजधानी था। तारा सिंह गैबा की 1807 में मौत के बाद महाराजा रणजीत सिंह ने इसे अपने राजपाठ में मिला लिया।

रंजीत सिंह ने राहों की बजाए नवांशहर में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने का निर्णय लिया। शहर में बारादरी पार्क का निर्माण करवाते के लिए फौज की टुकड़ी भी बिठा दी। इसी समय कपूरथला के दीवान बन्नामल ने शिवालय मंदिर बनाया। यह दोनों इमारतें 19वीं सदी के दौरान शहर की पहचान बनीं। शहर में सन् 1914 में रेलवे लाइन बिछी और 1918 में दानामंडी बनी। नवांशहर के पहले सांसद बलदेव सिंह के प्रयास से सतलुज दरिया पर रोपड़ पुल बना। तब नवांशहर चंडीगढ़ से जुड़ गया।

पूर्व मंत्री दिलबाग सिंह नवांशहर से छह बार विधायक बने। 1992 में कृषि मंत्री बने। उन्होंने 7 नवंबर 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरचरन सिंह बराड़ से मिलकर नवांशहर को जिला घोषित करवाया।

नवांशहर को जिला बनाए जाने की नोटिफिकेशन पर पर साइन करते तत्कालीन सीएम हरचरन सिंह बराड़।

51 लाख की थैली करती रही कांग्रेस को परेशान

शहरके लोगों ने जिला मुख्यालय के विकास के लिए 7 नवंबर 1995 को 51 लाख रुपए की थैली तत्कालीन मुख्यमंत्री हरचरन सिंह बराड़ को जिला स्थापना पर हुए कार्यक्रम में भेंट की थी। बराड़ तब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान थे। ये थैली कहां गई किसी