शहीद की सोच पर चलकर ही बढ़ सकता है देश
शहीद-ए-आजमकी सोच ही देश को आगे लेकर जाने में कामयाब हो सकती है। बराबरी की बात जो शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने की, उस पर हमारे देश की अब तक की सरकारों ने काम नहीं किया। इंसान के हाथों इंसान की लूट को ही शहीद-ए-आजम ने गलत ठहराया था, लेकिन यही रोकने में हमारी सरकारें कामयाब नहीं हो पा रहीं। खटकड़कलां पहुंचे लोगों (अधिकतर युवाओं) का कहना है कि अगर सरकारें शहीद-ए-आजम के फलसफे पर काम करें, तो दुनिया स्वर्ग बन सकती है।
^ यूपी के गांव गोला (खीरी) निवासी अमृत सिंह कहते हैं कि उनकी रिश्तेदारी बंगा में है। कई सालों से वह भगत सिंह के गांव आना चाहते थे। इस बार मौका मिल ही गया। उन्होंने बताया कि खटकड़कलां पहुंच तथा शहीद से जुड़ी यादें देख उन्हें अलग ही अनुभव हुआ। पता चला कि किन मुश्किलों से निकलकर हमारे शहीदों ने हमें आजादी दिलाई है। शहीद-ए-आजम ने इंसान के हाथों इंसान की लूट को ही सबसे बड़ी लूट बताया था तथा उसे रोकना ही जरूरी है।
^जालंधर के माई हीरां गेट निवासी मंजीत सिंह कहते हैं कि भगत सिंह जैसे शहीदों की वजह से ही आज हम आजादी की हवा में सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक की सरकारों ने शहीद-ए-आजम की सोच को समझा ही नहीं। अगर शहीद भगत सिंह की सोच पर चलकर हम देश के लिए काम करें, तो हमारा देश दुनिया का सबसे अग्रणी देश बन सकता है। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह ने अपनी जान की परवाह कर हमारे लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।
^ अमृतसर के रंजीत एवेन्यू में रहने वाले साहिल कहते हैं कि खटकड़कलां से उन्हें शहीदों के बारे में कई जानकारियां मिली हैं, जोकि उन्हें पहले नहीं पता थी। हमारे शहीदों ने जिन-जिन मुश्किलों से गुजरकर हमें इस खुली हवा में सांस लेने के काबिल बनाया, उसका कर्ज हमारी कौमें कभी भी नहीं उतार सकतीं। उन्होंने कहा कि शहीदों के बताए मार्ग पर चलकर ही हम नया भारत बना सकते हैं तथा इसके लिए जरूरी है कि उनकी सोच पर अमल करें।
^गांव ढेह (रोपड़) के प्लस वन के छात्र हरशरणजीत सिंह कहते हैं कि उन्होंने अब तक किताबों में ही भगत सिंह के बारे में पढ़ा था। उन्होंने कहा कि शहीद उनके परिवार साथियों के बारे में जानकारियां हासिल कर वह काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। हरशरणजीत ने कहा कि वह अपने इस अनुभव के बारे में साथियों को भी बताएंगे तथा अगले साल और साथियों को खटकड़कलां लेकर आएंगे।