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आशुतोष महाराज मामले में हाईकोर्ट से पुनर्विचार की मांग
दिव्यज्योति जागृति संस्थान के संत आशुतोष महाराज की समाधि के बारे में फैसले को गंभीरता से लेना चाहिए। इससे उनके अनुयायियों को ही नहीं ब्लकि इस मामले में देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। यह बात पुर्व पार्षद मनजीत कौर, गुरदेव कौर रचना छाबड़ा ने नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति संस्थान में मोबाइल से बात की। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्योति संस्थान मे हमेशा लोगों को धार्मिक से जोडऩे की बात की है। उन्होंने बताया कि कई बार आशुतोष महाराज के प्रवचन सुनने का मौका मिला।
उन्होंने कहा कि अगर गोवा के चर्च में पादरी के शरीर को तीन सदियों से संभाल कर रखा जा सकता है तो आशुतोष महाराज के मामले में इतनी जल्दी नहीं दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में संत, महापुरूष पहले भी समाधियों में जाते रहे हैं तथा लोगों की भावनाओं को देखते हुए हाईकोर्ट को संजीदगी से फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। मौके पर परमजीत कौर नौरेवाले, जरसेम कौर, सुनिता रानी, नीतिका भूच्चर, पूनम मानिक, रिंपी पूरी, गीता रानी, पूनम सहजल, शुभ मानिक आदि मौजूद रहे।
श्रद्धालुओंकी भावनाएं जुड़ी हैं महाराज के साथ
राहों| युवापरिवार सेवा समिति की बैठक डा. सतनाम सहजल की अगुवाई में की गई, जिसमें बलकार सिंह दयाल चंद, गगनप्रीत, डा. सुरिंदर, दीपक सिंह, अरविंदर सिंह, अमन, जस्सा, सतजीत सिंह, इंद्रजीत, जसविंदर सिंह, मनजीत राम, कुलविंदर सिंह गुरप्रीत सिंह आदि मौजूद रहे। बैठक में डा. सतनाम सहजल ने कहा कि महाराज आशुतोष के अंतिम संस्कार का फैसला हाईकोर्ट द्वारा करने से करोड़ों श्रद्धालुओं के दिलों को ठेस पहुंची है। क्योंकि महाराज जी की समाधि से पंजाब के लोगों की परेशानी नहीं है और ही कोई विवाद है। बैठक में सभी श्रद्धालुओं ने माननीय हाईकोर्ट से अपील की है कि सरकार का फैसला बदला जाए।
समाधिबारे फैसले का हक अनुयायियों को ही
नवांशहर| दिव्यज्योति जागृति संस्थान के संत आशुतोष महाराज की समाधि के बारे में फैसला करने का हक उनके अनुयायियों को ही है तथा इस मामले में करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। यह बात दलित संगठनों की एक बैठक में अंबेडकर सेना के प्रधान परमजीत सिंह पम्मा, युवा परिवार सेवा समिति के प्रधान सतनाम सहजल, श्री गुरु रविदास एकता मंच से राजेश पुरी आदि ने कही। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्योति संस्थान लोगों को नशों