काम, क्रोध, मोह, अंहकार त्याग कर प्रभु सिमरन करें : स्वामी शिवचिदानंद
मनुष्यकोकाम, क्रोध, मोह, अंहकार त्याग कर परमात्मा का सिमरन करना चाहिए। जीवन में हर किसी की सहायता सेवा भाव से करनी चाहिए। यह बात दिव्य जीवन संघ ऋषिकेश के स्वामी शिवचिदानंद महाराज ने कही।
वे स्वामी चिदानंद की जन्मशताब्दी पर स्वामी शिवानंद की अखिल भारतीय चरण पादुका दर्शन एवं अध्यात्मिक प्रचार यात्रा के दौरान शिवाला पं. जय दयाल ट्रस्ट घास मंडी मंदिर में संत प्रवचन में उपस्थित संगत को संबोधन कर रहे थे। उनके साथ मंच पर स्वामी शिवा चिदानंद महाराज (ऋषिकेश), स्वामी धर्मनिष्ठा नंद महाराज (ऋषिकेश), प्रो. जयंत भाई दवे (अहमदाबाद), प्रो आर के राधा मोहन (मनीपुर) के साथ नहर की कुटिया से स्वामी सीता राम दास विराजमान रहे। स्वामी शिवचिदानंद ने कहा कि मनुष्य को अपनी आयु तथा परिस्थितियों के अनुसार ब्रह्मचार्य-व्रत का पालन करना चाहिए। स्वामी धर्मनिष्ठानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन गीता का एक अध्याय या उसके 10 से 15 श्लोकों का अर्थ सहित अध्ययन करना चाहिए। रात को जल्दी सो कर प्रात:काल चार बजे उठ कर जप, प्रार्थना, ध्यान आदि करना चाहिए।
श्री जयंत भाई दवे जी ने कहा कि जो किसी का बुरा नहीं करता, धर्म के नाम में अच्छा काम करता है। उसका सदैव भला ही होता है। धन, मकान, सब कुछ यही रह जाता। ईश्वर की साधना सच्ची श्रृद्घा अंर्तध्यान होकर करनी चाहिए तभी जीवन सफल किया जा सकता है।
इस दौरान प्रो. आरके राधा मोहन ने भजन राधा के नाम अनमोल.., हे प्रभो आनन्ददाता ज्ञान हमको दीजिए.. इत्यादि सुना कर संगत को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। हरे रामा रामा हरे.. महामंत्र से कार्यक्रम संपन्न हुआ। संगत ने चरण पादुका के दर्शन कर जीवन सार्थक किया।
अंत में संगत के लिए लंगर भी लगाया गया। मौके पर दिव्य जीवन संघ नवाशहर शाखा के प्रधान मनोरंजन कालिया, डा. बृज मोहन बड़थवाल, जीसी शुक्ला, कृष्ण कुमार सरीन, अशोक वर्मा, विजय वर्मा, राम सरूप जोशी, महेश दत्ता, पं. भगवान दास, अशोक चोपड़ा, मोद्य प्रकाश पाठक, प्रो. अजीत सरीन, दीक्षित भारद्वाज, डॉ. जेडी वर्मा आदि गण्यामान्य के साथ भारी संख्या में महिलाएं भी हाजिर रही।
प्रवचनों का श्रवण करती संगत। (इंसेट में संगत को प्रवचन देते हुए स्वामी जी।