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मजदूरों के अधिकार दिलाने के संकल्प से संपन्न हुआ इजलास

7 वर्ष पहले
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गांवखानखाना में आयोजित आल इंडिया खेत मजदूर यूनियन पंजाब का 29वां इजलास माक्र्सवाद की नीति के तहत मजदूरों को उनके अधिकार दिलाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

तीन दिवसीय चले इजलास के अंतिम दिन मनरेगा मजदूरों तथा सरकार के विषय पर चर्चा हुई। इजलास के दौरान मजदूरों को संबोधित करते हुए नवनियुक्त प्रधान राम सिंह नूरपुरी ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार ने चालू वित्त वर्ष में मनरेगा मजदूरों को 81 करोड़ 20 लाख 95 हजार रुपए दिहाड़ी की पेमेंट अदा नहीं की है। उन्होंने कहा कि राज्य में 10 लाख 73 हजार 627 मनरेगा मजदूरों के जाब कार्ड हैं, जिसमें 8 लाख 76 हजार 147 मजदूर पिछड़ा वर्ग, 654 पिछड़ा कबीला तथा 2 लाख 76 हजार 126 अन्य खेत मजदूर हैं।

नूरपुरी ने कहा कि सरकार ने मजदूरों से 228 करोड़ 75 हजार रुपए का काम मनरेगा के तहत करवाया है, जिसमें 81 करोड़ 20 लाख 95 हजार रुपए का भुगतान मनरेगा मजदूरों को नहीं किया गया, जबकि 16 करोड़ 53 हजार रुपए मेटीरियल खरीद-फरोख्त के बकाया हैं। इस कार्य में लगे 42 लाख रुपए मिस्त्री मजदूरों के 3 लाख 3 हजार रुपए टैक्स अदा नहीं किए गए। उन्होंने राज्य के जिलों में मजदूरों के बकाए की सूची बताते हुए कहा कि नवांशहर जिले में 2 करोड़ 34 लाख, लुधियाना में 9 करोड़ 85 लाख, फतेहगढ़ साहिब में 8 करोड़ 37 लाख, फाजिल्का में 6 करोड़ 63 लाख, मुक्तसर 6 करोड़ 6 लाख, फरीदकोट में 5 करोड़, होशियारपुर में 5 करोड़ 2 लाख, अमृतसर में 2 करोड़ 2 लाख, जालंधर में 2 करोड़ 5 लाख, फिरोजपुर 4 करोड़ 25 लाख, गुरदासपुर 4 करोड़ 69 लाख, कपूरथला 2 करोड़ 1 लाख, मानसा में 2 करोड़ 34 लाख, पठानकोट में 3 करोड़ 45 लाख, पटियाला 1 करोड़ 3 लाख, रोपड़ 2 करोड़ 98 लाख, संगरूर 4 करोड़ 14 लाख, मोहाली 1 करोड़ 75 लाख, तरनतारन में 83 लाख रुपए मजदूरों का बकाया है। संगठन के प्रदेश महासचिव वासुदेव जमशेर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार विकास के दावे करती है। केंद्र सरकार मनरेगा के पैसे का पंजाब सरकार से हिसाब मांगे। पैसा मजदूरों के खाते में जाए, जिससे उनका जीवन स्तर ऊंचा हो सके। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने 100 दिन तथा मोदी सरकार ने 45 दिन में रोजगार देने की बात करके इसे कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि 625 जिलों में शुरू हुई इस योजना को देश के 200 जिलों में पिछड़े क्षेत्रों में मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची जा रही है,