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निजी कंपनी से ऑडिट के खिलाफ पंचायतों का धरना
पंचायतयूनियन पंजाब के आह्वान पर सरपंचों, पंचों कर्मचारियों ने पंचायतों के ऑडिट निजी कंपनी से करवाने के फैसले को गलत ठहराते हुए पंचायत कार्यालय के समक्ष धरना दिया। इस दौरान सरकार के फैसले अन्य मांगों के संबंध में प्रर्दशनकारियों ने नारेबाजी भी की। धरने को यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष हरमिंदर सिंह मावी, दोआबा जोन के इंचार्ज भुपिंदर सिंह लधाणा, अजीत सिंह सोइता, सक्तर जर्नल नरिंदर पाल सिंह बाजवा ने संबोधित किया।
फैसलातानाशाहीपूर्ण
पंचायतयूनियन नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार पंचायतों पर तानाशाही करके अपने फैसले थोप रही है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। हालत यह है कि सरकार ने पंचायतों को मिले अधिकार वापिस लेने के फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। कहा कि पंचायतों द्वारा करवाए विकास कार्यों के अॉडिट सरकार निजी कंपनी/फर्म के सीए से करवाकर एक तरफ पंचायतों को जलील करना चाहती है और दूसरी तरफ सरपंचों पर भारी रिकवरी थोप कर खाली खजाने भरना चाहती है। धरने को परताप सिंह काकड़ा, गुरविंदर सिंह, बलविंदर सिंह भियोरा, डा. दलविंदर सिंह, गुरिंद सिंह मोगा, सुरजीत सिंह रूप नगर, बलविंदर सिंह मोहाली, मनदीप सिंह फतेगढ़ साहिब, निहाल सिंह मोगा ने भी संबोधित किया। यूनियन के अनुसार इस मौके पर निरमल सिंह बाजीदपुर, सतनाम सिंह दुधाला, परमजीत संह किशनपुरा, बखशीश राम हियाला, रछपाल सिंह महालों, नरिंदर पाल सिंह बरनाला कलां, सुरिंदर कुमार झल्ली लंगड़ोया, हरविंदर हुसैन चक्क, हरमेश लाल महालों सहित अन्य पंच सरपंच भी मौजूद रहे।
पंचायतों द्वारा दिए धरने को संबोधित करते हुए पंचायत यूनियन नेता।
निजी कंपनियों से पंचायतों के फंड का ऑिडट करवाने के फैसले के खिलाफ पंच, सरपंचों और कर्मचारियों ने धरना दिया।
इन मांगों को लेकर किया जा रहा है संघर्ष
पंचायतयूनियन की मांग है कि सरकार निजी सीए से पंचायती रिकार्ड का अॉिडट करवाने की बजाय सरकारी सीए से ही यह काम ले। प्रदेश में 73वें संशोधन को लागू करके 29 विभागों के पूर्ण वित्तीय प्रशासकीय प्रबंधों के अधिकार पंचायतों को दिए जाएं। पंचायती जमीन पर लगी माइनिंग की पाबंदी हटाई जाए, विकास कार्यों के लिए मिट्टी की जरूरत को पूरा करने के लिए पंचायतों को ग्रांट में बिल डालने के अधिकार दिए जाएं। सरपंचों को प्रति माह 15 हजार रुपए और पंचों को प्रति माह मान भत्ता दिया जाए। गांवों में अच्छे पंचायत