माधोपुर में पुरखों की जड़ें तलाश रहे स्पेनिश टिम डायस
स्पेननिवासी70 वर्षीय टिम डायस (पेशे से ट्रांसलेटर) भारत में अपने पुरखों की जड़ें तलाशते हुए एक बार फिर माधोपुर पहुंचे हैं। टिम डायस के परदादा जोसेफ हेनरी डायस ने 1850 के बाद कई सालों तक माधोपुर में रहकर यूबीडीसी कैनाल का निर्माण कराया था।
टिम के पड़दादा की मौत भी भारत में ही हुई। टिम अपने पुरखों की भारत में विरासत को लेकर एक किताब भी लिख रहे हैं। टिम जर्मन-इंग्लिश के ट्रांसलेटर के साथ आर्गेनिक वाइन बनाने का काम भी करते हैं। कुछ साल पहले स्पेन के उनके घर में लकड़ी के संदूक में उनकी मां हेलन काे एक पुराना बैग मिला, जिसमें 70 पुराने लेटर तथा कुछ फोटो मिले। उसी विरासत को खोजते हुए वे माधोपुर कोरल में दिनेश महाजन के पास पहुंचे हैं।
कांगड़ाफोर्ट रोड प्रोजेक्ट भी बनाया था डायस ने
टिमने बताया कि वे मूल रूप से ब्रिटिश हैं, लेकिन बाद में उनका परिवार स्पेन चला गया। उनके परदादा जोसेफ हेनरी डायस 1845 में कांस्ट्रक्शन इंजीनियर के तौर पर भारत आए थे और 1846 में उन्हें कांगड़ा फोर्ट की सड़क बनाने का प्रोजेक्ट तथा 1848 में यमुना कैनाल करनाल का प्रोजेक्ट मिला। 1850 में उन्हें रावी पर अपर बारी दोआब कैनाल(यूबीडीसी) माधोपुर की डिजाइन और निर्माण का काम मिला। उस समय तक रावी का पानी दरबार साहिब अमृतसर तक जाता था। यूबीडीसी का काम करने वाले 300 मझवी सिख थे।
1859 में पूरा किया यूबीडीसी का काम
यूबीडीसीके पहले फेज का काम हेनरी ने 11 अप्रैल 1859 को पूरा किया और बाद में सहायक क्राफ्टन के साथ आयरलैंड चले गए। डेढ़ साल बाद वे प|ी कैथरीन (टिम की पड़दादी) के साथ माधोपुर लौटे और कैनाल का स्लोप डिजाइन किया।
बायोग्राफी भी लिख रहे टिम डायस
टिमने बताया कि उसकी जड़ें भारत में हैं इसलिए उसे यहां से बहुत लगाव है और वह अपनी इस विरासत को सहेजने के लिए बायोग्राफी लिख रहे हैं। इसके लिए वे कांगड़ा, रुड़की, नैनीताल जाएंगे।
यूबीडीसी के निर्माण के समय की फाइल फोटो।(दाएं) िटम डायस माधोपुर में दिनेश महाजन के साथ।