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हाईकोर्ट की टीम ने की स्कूली बसों की जांच, प्रबंधन को किया वार्न

5 वर्ष पहले
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स्कूलीबच्चों को घर से लाने-लेजाने में दिक्कत हो इसके लिए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग, ट्रांसपोर्ट रोडवेज को गाइडलाइंस जारी कर ‘सेफ स्कूल वाहन स्कीम’ लांच की है। पॉलिसी के मुताबिक बसें वेल कंडीशन्ड होनी चाहिएं। बसों की जांच के लिए प्रदेश जिला स्तरीय टीमें गठित की गई हैं। बुधवार को हाईकोर्ट की टीम ने पठानकोट के स्कूलों का दौरा किया और बसों की जांच की।

टीम में डिप्टी डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन अमरीश शुक्ला, ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर सुखजीत विर्क, चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम पंजाब के पीए-2 चेयरमैन बलबीर सिंह शामिल थे। टीम ने इस दौरान पठानकोट की स्कूली बसों के फर्स्ट-एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, फायर फाइटिंग इक्विपमेंट्स सहित बसों की कंडीशन इंटीरियर का मुआयना किया। कमी पाए जाने वाले स्कूलों को वार्निंग देकर जल्द से जल्द सभी शर्तों के मुताबिक गाड़ियों को ढालने के आदेश दिए हैं। सभी स्कूल संचालकों से एफिडेविट लिए जा रहे हैं कि अगर कोई घटना होती है तो प्रिंसिपल स्कूल मैनेजमेंट उसकी जिम्मेवार होगी। किसी को भी बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। बच्चों की सेफ्टी सबसे पहले है।

हाईकोर्ट की टीम बसों में सेफ्टी किट की जांच करती हुई। -भास्कर

1. सभी बसें एम2 एम3 मॉडल की होनी चाहिएं।

2. बस गोल्डन पीले रंग की होनी चाहिए।

3. टैंपर प्रूफ स्पीड गवर्नर लगे हों, अधिकतम स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो।

4. बस का फिटनेस और इंश्योरेंस सर्टिफिकेट हो।

5. मोटर व्हीकल एक्ट-1988 के नियमानुसार बसें चलनी चाहिए।

6. विंडो में ग्रिल हो और बस के भीतर पर्दा नहीं होना चाहिए।

स्कूलों, एसटीए और ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी तय

सेफस्कूल वाहन पॉलिसी के तहत स्कूलों, एसटीए और ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी तय की गई है। पॉलिसी में स्कूल बसों की क्वालिटी कंडीशन पर फोकस किया गया है। यह हिदायत है कि कंडम बसें इस्तेमाल की जाएं। इसमें बस ऑपरेटर को 30 दिन का रिकार्ड रखने को निर्देश दिया गया है। साथ ही बसों के रूट के बारे में भी पूरा रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य है। सभी स्कूली बसों में प्राथमिक उपचार के लिए बॉक्स रखना जरूरी है। इसमें फायर सेफ्टी उपकरण रखे जाने चाहिएं।

सख्ती से लागू होंगे नियम: डीईओ

^हाइकोर्टके आदेश का सख्ती से पालन करवाया जाएगा। स्कूलों के साथ-साथ पेरेंट्स को भी अवेयर किया जा रहा है कि बच्चों को सेफ वाहनों में ही भेजें। स्कूल प्रबंधन को सभी नियमों का पालन करने के लिए कहा जाएगा। -पवनकुमार, डीईओ, सेकेंडरी

15 दिन में 40 बसें की इंपाउंड : डीटीओ

^पिछले15 दिनों में 40 के करीब बसें इंपाउंड की हैं। स्कूल संचालकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं, फिर भी अगर कोई हाइकोर्ट की शर्तें नहीं मानेगा तो उनकी बसों का परमिट कैंसिल कर दिया जाएगा। किसी को भी बच्चों की सेफ्टी से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। -जसवंतसिंह ढिल्लों, डीटीओ

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