माया में फंसकर प्रभु को भूला इंसान : विश्वात्मानंद
अद्वैतस्वरूपसंन्यास आश्रम खदावर में ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मशव्दानंद के पांचवें निर्वाण दिवस पर कार्यक्रम स्वामी दिनेशानंद पुरी महाराज की अध्यक्षता में करवाया गया। इसमें महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सुंदरबनी वाले विशेष रूप से उपस्थित हुए। इस मौके पर विभिन्न स्थानों से पहुुंचे संतों की ओर से स्वामी ब्रह्मशव्दानंद जी के जीवन चरित्र पर अपने विचार रखे तथा उनके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर स्वामी विश्वात्मानंद दिनेशानंदपुरी ने कहा कि संसार के सभी लोग सुख चाहते हैं, लेकिन माया में फंसकर आज का इंसान प्रभु को भूल चुका है, इसलिए उन्हें सुख शांति प्राप्त नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि ईश्वर का सिमरन करने गुरु की शरण में जाने से ही सुख शांति प्राप्त हो सकती है, जो व्यक्ति नाम सिमरन करते हैं प्रभु उनके दुखों को दूर कर उनके जीवन को खुशियों से भर देते हैं, इसलिए हम सबको रोजाना परमपिता परमात्मा का नाम सिमरण करना चाहिए। इस अवसर पर आदेशानंद पुरी, राम पुरी, देवानंद पुरी, अदियाल पुरी, रसाल सिंह, धर्मवीर, बाऊ राम, बलराज, राजेश महाजन गोगी, भूपिन्द्र सिंह, अनिल महाजन आदि मौजूद थे।
अद्वैत स्वरूप संन्यास आश्रम में करवाए कार्यक्रम में मौजूद संगत।
प्रवचन करते स्वामी विश्वात्मानंद महाराज।
पठानकोट | गुरुद्वारादमदमा साहिब मीरपुर कालोनी में मुख्य प्रबन्धक गुरदीप सिंह गुलाटी की देखरेख में संक्रांति बसंत के उपलक्ष्य में गुरमति समागम करवाया गया। इसमें गुरुद्वारा साहिब के सुखविन्द्र सिंह ने फाल्गुन महीने के बारे में गुरुबाणी में दर्ज महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा से मिलन का एकमात्र रास्ता नाम सिमरन सत्संग में जाना है। इसके पश्चात भाई कुलवंत सिंह बेबे नानकी स्त्री सत्संग सभा के रागी जत्थे ने रसमयी कीर्तन कर संगत को निहाल किया। अंत में गुरु साहिब का लंगर अटूट वितरित किया गया। इस अवसर पर सर्कल अध्यक्ष जत्थेदार जसबीर सिंह संधू, मास्टर चन्नण सिंह, सुरेन्द्र सिंह, सुरजीत सिंह सब्जीमंडी, नरेन्द्र, सोहन सिंह, जगजीत सिंह, राम, गुरशरण सिंह, ओंकार सिंह, र| कौर, बसंत कौर, भूपिन्द्र कौर आदि उपस्थित थे।