6 लाख रुपए में लगाईं पानी की 6 मोटरें महीनेभर में 3 खराब, जांच के आदेश
खराब मोटरों को कराया था ठीक : ठेकेदार
मोटरों की जांच को तीन सदस्यीय टीम गठित
भास्कर संवाददाता|पठानकोट
जिला प्लानिंगबोर्ड द्वारा नगर निगम को दिए गए 6 लाख रुपए से लगवाई पानी की मोटरें 1 महीना भी नहीं चल पाईं। 6 में से 3 मोटरें 1 महीने के भीतर ही खराब हो गईं।
मामला सामने आने पर जिला प्लानिंग बोर्ड चेयरमैन सतीश महाजन ने इसके लिए जांच बिठाई है। उन्होंने घटिया मोटरें लगाने वाले ठेकेदार अौर जिम्मेवार निगम अधिकारी पर कार्रवाई को कहा है। इसके लिए एसडीएम मेजर अमित महाजन, ट्रस्ट एक्सईएन सतपाल ट्यूबवैल कार्पोरेशन के एक्सईएन को जांच का जिम्मा सौंपकर 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। वहीं, मोटरें लगाने वाले ठेकेदार ने किसी भी मोटर के खराब होने की बात को खारिज कर दिया। निगर के मेयर अनिल वासुदेवा ने भी माना कि 3 में से 1 मोटर ही चल रही है और 2 मोटरें खराब हैं।
Ãमोटरें लगाने वाले ठेकेदार नवनीत सनौत्रा का कहना है कि जो मोटरें खराब हुई थीं, उन्हें ठीक करा दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि वाटर मोटरों की क्वाॅलिटी घटिया नहीं थी। फिर भी वह खुद जाकर मोटरों का एक बार फिर जायजा लेंगे।
15 दिन में मांगी रिपोर्ट
Ãजिलाप्लानिंग बोर्ड चेयरमैन सतीश महाजन का कहना है कि यह गंभीर मामला है कि 1 महीने के भीतर ही मोटरें कैसे खराब हो गईं? खराब मोटरों की जांच के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है और 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
Ãवार्ड नंबर 43 के एमसी विजय चूनी ने कहा कि मेरे वार्ड की मोटर भी खराब हुई थी। इसकी कंप्लेंट हाउस मीटिंग में की थी पर अब मोटर ठीक करवा दी गई है।
à 3 में से 2 अभी भी खराब हैं। उन्हें रिप्लेस या रिपेयर किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सीवरेज बोर्ड को सौंपी है। अनिलवासुदेवा, मेयर, नगर निगम।
थाना डिवीजन नंबर एक में खराब पड़ी मोटर।
जिला प्लानिंग बोर्ड की मीटिंग में उठा था मुद्दा
निगमने जिला प्लानिंग बोर्ड के 6 लाख रु. से वार्ड नंबर 43, आनंदपुर टंकी, ऑफिसर कालोनी, थाना डिवीजन नंबर 1, मोहल्ला रामपुरा और पीर बाबा मोहल्ला आनंदपुर में वाटर मोटरें लगवाई थीं, इनमें से 3 मोटरें महीने के अंदर ही खराब हो गईं। वार्ड 43 के प्रधान विजय चूनी ने इसकी कंप्लेंट हाऊस मीटिंग में की थी। वार्ड नंबर 9 के पार्षद जिला प्लानिंग बोर्ड चेयरमैन सतीश महाजन ने भी इसकी सूचना मेयर अनिल वासुदेवा को दी। इसके बाद 9 फरवरी को हुई जिला प्लानिंग बोर्ड की बैठक में मुद्दा उठाया गया और इसकी जांच को 3 सदस्यीय जांच टीम गठित की गई।