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सॉलिड वेस्ट प्लांट के लिए गांव गुड़ा में जमीन तलाशी, अब एयरफोर्स से एनओसी का इंतजार
एनओसी मिलते ही शुरू करवा देंगे प्लांट का काम
समाधान-सॉलिड वेस्ट प्लांट लगने से कूड़ा डंपिंग समस्या दूर हो जाएगी
दससालसे जिला प्रशासन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए जमीन की तलाश कर रहा है पर अभी तक जमीन फाइनल नहीं हो पाई है। 5वें अटेंप्ट में अब प्लांट के लिए गांव गुड़ा के दो स्थानों पर मंथन चल रहा है। ये दोनों स्थान एयरफोर्स स्टेशन के एक किलोमीटर दायरे में हैं। यहां प्लांट लगाने के लिए एयरफोर्स की मंजूरी लेना जरूरी है।
बता दें कि जिला प्रशासन ने सबसे पहले अटेंप्ट में गांव कलानौर की जगह पसंद की। लेकिन यहां पर लोगों के विरोध के चलते काम ठंडा पड़ गया। इसके बाद डेयरीवाल में 60 एकड़ जमीन पर कोशिश की तो एयरफोर्स प्रशासन ने आपत्ति जताई। बाद में गांव चक्क अखवाना में प्लांट लगाने वाली कंपनी ने यह कहकर मना कर दिया कि इस गांव में 1987 में बाढ़ आई थी और कंपनी से हुए करार के मुताबिक प्लांट उस गांव में लगेगा जहां पिछले 100 सालों में बाढ़ आई हो। वहीं, धार के गांव टिका में वाइल्ड लाइफ विभाग ने भी एनओसी देने से इनकार कर दिया।
अब प्रशासन एफएसएंडएफसी कंपनी ने पठानकोट-जालंधर रोड पर गांव गुड़ा में 2 स्पॉट्स को आइडेंटिफाई किया है, जिसका प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है। लेकिन, यह एरिया भी एयरफोर्स से 15 कि.मी. के प्रतिबंधित दायरे में आता है। जिला प्रशासन ने एनओसी के लिए अप्लाई कर दिया है।
4. धार ब्लॉक के टिका गांव में वाइल्ड लाइफ विभाग ने एनओसी से मना कर दिया
3. गांव चक्क अखवाना में बाढ़ के कारण चिन्हित जमीन फाइनल नहीं हो पाई
2. डेयरीवाल में एयरफोर्स की आपत्ति के कारण प्लांट का काम धरा ही रह गया
अड़चनें -1. कलानौर में लोगों के विरोध के चलते सहमति नहीं बन पाई
Ãजिले में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए मुख्य सचिव से बात हो गई है। फिर दोबारा मीटिंग की जाएगी। मेन प्रॉब्लम प्लांट के लिए जमीन के चयन की थी और इसके लिए कंपनी की सहमति क्लीयर है। अब एयरफोर्स से एनओसी लेनी है। एनओसी मिलते ही प्लांट तैयार करवा दिया जाएगा। -अनिलवासुदेवा, मेयर, नगर निगम।
गांव गुड़ा की जमीन, जो प्लांट के लिए प्रस्तावित है। एनओसी के लिए प्रशासन ने एयरफोर्स के पास अप्लाई कर दिया है।
प्लांट में पठानकोट, सुजानपुर, दीनानगर, गुरदासपुर, धारीवाल, बटाला, फतेहगढ़ चूड़ियां, कादियां, अजनाला, मुकेरियां की नगर कौंसिलों से इकट्ठा होने वाले कूड़े को एक जगह डंप किया जाना है। प्लांट बनने के बाद यहां इन नगर कौंसिलों में कूड़ा डंप करने की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा, वहीं निगम की आय भी बढ़ेगी। अनुमान के मुताबिक पठानकोट शहर में औसतन रोजाना 70 मीट्रिक टन के करीब कूड़ा इकट्ठा होता है।
फायदा-आमदनी का आधा हिस्सा नगर कौंसिल और निगम को जाएगा
निगमअफसरों का कहना है कि प्लांट लगने के बाद कंपनी के कर्मचारी ट्रकों-ऑटो अन्य संसाधनों के जरिए शहर अन्य क्षेत्रों से इकट्ठा किए कूड़े का वैज्ञानिक इस्तेमाल करेंगे और इससे बिजली और खाद बनाई जाएबी। कूड़े को री-साइकिल करके इससे बनने वाले सामान से होने वाली आमदनी का आधा हिस्सा उस नगर कौंसिल अथवा निगम को मिलेगी, जहां से कूड़ा आया है। मतलब नगर कौंसिलों और निगम को कूड़े से भी कमाई होगी।
एयरफोर्स की आपत्ति- डेयरीवाल में कूड़ा डंपिंग से उड़ानें होती हैं प्रभावित
गांवडेयरीवाल में प्लांट लगाने पर एयरफोर्स ने यह कहकर आपत्ति जताई थी कि एयरफोर्स एरिया से 15 कि.मी. दायरे में गार्बेज डंप करने पर पक्षी आसमान में मंडराएंगे और इससे एयरफोर्स की उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। अब गांव गुड़ा की जो जमीन जिला प्रशासन एक्वायर करने के बारे सोच रहा है, वह जमीन भी एयरफोर्स से 15 कि.मी. दायरे में आती है। जिला प्रशासन को पूरा भरोसा है कि इस बार एयरफोर्स एनओसी जारी कर देगा।