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कांग्रेस को भारी पड़ सकती है मान और साेढ़ी की लड़ाई

7 वर्ष पहले
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नगरनिगम वार्डबंदीके साथ ही फगवाड़ा में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टियों में आपसी गुटबाजी चरम पर है। हालात जिस तरीके के हैं उससे लगता है भाजपा तो शायद इससे कुछ हद तक उबर भी जाए लेकिन कांग्रेस के सामने चुनौती बड़ी है। यदि हाईकमान ने समय रहते इंतजाम नही किया तो प्रत्याशियों का चयन भी चुनौती बन सकता है। हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान फगवाड़ा से 4851 वोटों से जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस को आस जरूर लगाए है कि उन्हें निगम चुनावों में कामयाबी मिलेगी। लेकिन कांग्रेसी यह भूल जाते हैं कि विधानसभा चुनाव के दौरान इस हल्के से भाजपा ने साढ़े 14 हजार वोटों से भी ज्यादा के फर्क से जीत दर्ज की थी। लेकिन लोकसभा में हार का सामना करना पड़ा था। यदि कांग्रेस में समय रहते धड़ेबंदी काबू नहीं होती तो पार्टी ने विधानसभा चुना के बाद इस क्षेत्र में जो कमाया था वह गंवाने में बहुत अधिक समय नहीं लगेगा।

कांग्रेस में पूर्व कैबिनेट मंत्री जोगिंद्र सिंह मान और हल्का इंचार्ज बलवीर राजा सोढी के अपने-अपने धड़े हैं। स्थानीय कांग्रेस में दोनों में से किसी के भी कद को कम करके नहीं आंका जा सकता। जोगिंद्र सिंह मान की यदि बात करें तो वे देश के पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह के भांजे हैं। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री के साथ ही कई अहम पदों पर भी रह चुके हैं। मान पंजाब कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा खेमे के माने जाते हैं।

बलवीर राजा सोढी का भी अपना राजनीतिक कद है। वह इंप्रूवमेंट ट्रस्ट फगवाड़ा के चेयरमैन के साथ पार्टी के भी अहम पदों पर रह चुके हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान सोढी ने हल्का फगवाड़ा से कांग्रेस का टिकट लेकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। हालांकि धड़ेबंदी के चलते वे चुनाव हार गए थे। लेकिन तब से वे खुद का कांग्रेस के हल्का इंचार्ज के रूप में प्रोजेक्ट करते रहे हैं। सोढी कैप्टन अमरेंद्र सिंह के करीबी माने जाते हैं। ब्लाक कांग्रेस के प्रधान गुरजीत पाल वालिया शुरू से ही सोढी के साथ खड़े हैं। वालिया के बारे में कहा जाता है कि वे किसी समय में मान के खासमखासों में थे। गुटबाजी ब्लाक स्तर तक घुसी है। ब्लाक के दो-दो प्रधान हैं। एक संजीव बुग्गा और गुरजीत पाल वालिया। मान और साेढ़ी के चक्कर में पार्टी स्पष्ट नहीं कर पा रही है कि आखिर असली ब्लाक प्रधान कौन है। इससे सबसे बड़ी समस्या