हिंदी दिवस : भाषा के विकास में योगदान
रामधारी सिंह दिनकर और हरिवंश राय बच्चन। हिंदी के दो महान कवि। दोनों की लेखन शैली एक दूसरे से जुदा। दिनकर वीर रस के कवि थे तो बच्चन व्यक्तिवादी कविता के अग्रणी थे। दोनों में श्रेष्ठ कवि कौन था। यह सवाल कई बार उठाया जाता है लेकिन कमला नेहरू कॉलेज की वर्तमान प्रिंसिपल डॉ किरण वालिया ने अपनी पीएचडी के दौरान दोनों कवियों को एक दूसरे के समानांतर ला दिया था। उन्होंने छायावादी काव्य के लिए दोनों में तुलनात्मक अध्ययन किया था। दिनकर के बराबर उन्हें लाने के लिए हरिवंश राय बच्चन ने खत लिख उन्हें शुक्रिया भी
हिंदी दिवस : भाषा के विकास में योगदान
डॉ. वालिया को लिखी चिट्ठी।
प्रिंसिपल डॉ. किरण वालिया।
बदकिस्मत रही, बच्चन से मिल पाई
डॉ.वालिया कहती हैं कि मुझे ताउम्र दुख रहेगा कि मैं बच्चन से मिल नहीं पाई। उनसे खत के जरिए तो बात होती रही पर जब मैं पढ़ाई से फ्री हुई तो करियर बनाने में लग गई। वह दुनिया से चले गए। हालांकि बच्चन ने एक बार मुझे अपने एक दोस्त आरएन बाबा के बारे में लिखा। बाबा होशियारपुर के एक कॉलेज के प्रिंसिपल थे। बच्चन और बाबा इंग्लैंड में एक साथ रिसर्च कर चुके थे। मैं बाबा से मिली जहां उन्होंने बच्चन के साथ कई तस्वीरें दिखाईं।
दिनकर के बराबर लाने पर बच्चन ने किया था डॉ. वालिया का शुक्रिया
राजेश कुमार | फगवाड़ा
\\\"कविबनने के लिए बस जिंदगी के तजुर्बे की जरूरत होती है। जब आपकी लिखी लाइनें दूसरों को अपने जीवन से जुड़ी हुई लगने लगे तो आप कवि हैं।’
यह बात हरिवंश राय बच्चन ने किरण वालिया को भेजी चिट्ठी में लिखी थीं। बात 1974 की है। वालिया उस समय एम. फिल कर चुकी थीं। उन्होंने मोहन राकेश के नाटकों पर रिसर्च की थी। पीएचडी के लिए विषय तलाश रही थीं। हरिवंश राय बच्चन की कविता ‘मधुशाला’, ‘अग्निपथ’, ‘सोपान’ आदि कई रचनाएं किरण वालिया को प्रभावित कर चुकी थीं। उनके हाथ रामधारी सिंह दिनकर की ‘उर्मिला’ लगी। यह किताब उन्होंने पढ़ी। बढ़िया लगी। फिर पढ़ी। इसके बाद दिनकर की ही कुरुक्षेत्र पढ़ी तो हैरानी हुई-एक कवि दो बिल्कुल अलग तरह के काव्य इतने बढ़िया तरीके से कैसे लिख सकता है। ‘कुरुक्षेत्र’ में हुंकार और वीररस है जबकि ‘उर्मिला’ प्रेम का बोध करवाती है।
अब पीएचडी के लिए उन्हें विषय मिल चुका था- वह दिनकर और बच्चन दोनों पर एक साथ लिखना चाहती थीं। दिनकर का निधन हुए कम ही समय हुआ था। ऐसे में सोचा क्यों बच्चन को चिट्ठी लिख राय लूं। बच्चन उस समय लोकप्रियता के शिखर पर थे। उनकी कविताओं में वीर रस के कारण हिंदी साहित्य के प्रशंसक उनके मुरीद बन गए थे। इसलिए इस बात की संभावना बहुत कम थी कि वह खत का जवाब देंगे। फिर भी किरण वालिया ने उन्हें खत लिखा। कुछ दिन बाद उन्हें जवाबी खत गया। बच्चन ने उन्हें यह विषय चुनने के लिए मुबारकबाद दी थी, साथ ही शुक्रिया कहा था कि आपने मुझे दिनकर के बराबर समझा। इस तरह डॉ. वालिया ने पीएचडी में विषय रखा-दिनकर और बच्चन के काव्य में स्वछंदवादी बोध का स